Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

'नाला गैस' की खोज पर अमेरिका ने कहा- "भारत में लोकतंत्र को ख़तरा!"

16, Aug 2018 By Saquib Salim

एजेंसी. दुनिया भर में उस समय खलबली मच गयी जब मालूम चला कि भारत में नालों से उठने वाली बदबूदार गैस असल में कोई मामूली गैस नहीं है, बल्कि इसका उपयोग रसोई गैस और ईंधन गैस के रूप में किया जा सकता है। इस खोज से एक ओर जहाँ वैज्ञानिक आश्चर्यचकित हैं तो वहीँ दूसरी ओर पेट्रोलियम क्षेत्र की बड़ी कंपनियाँ इस जुगत में लग गयी हैं कि किस प्रकार वे नालों को राष्ट्रीय सम्पदा घोषित करा कर उसके सरकारी ठेके हासिल कर सकें।

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भारत के लोकतंत्र की ओर इशारा करते ट्रंप

इस सबके बीच, रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस नयी खोज से देश की सुरक्षा को ख़तरा उत्पन्न हो सकता है। रक्षा मामलों के विशेषज्ञ (जो कि हर मामले के विशेषज्ञ हैं) श्री रक्षा सिन्हा जी ने हमसे बात करते हुए बताया कि “भारत देश की इस अनूठी, अद्भुत, अविस्मरणीय एवं महान खोज से विश्व में खलबली मच गयी है। भारत रातों-रात पेट्रोलियम पदार्थ का निर्यात करने वाले देशों की श्रेणी में आ खड़ा हुआ है और अब इराक़, ईरान और सऊदी अरब जैसे देशों में शामिल हो गया है।”

यह पूछे जाने पर कि “यह तो प्रसन्न होने की बात है, इससे खतरा कैसा?” तो उन्होंने समझाया कि “दुनिया में जहाँ कहीं भी तेल या गैस पायी जाती है, वहाँ के बारे में अमेरिका की जनता और वहाँ की सरकार को ऐसा लगने लगता है कि उस देश में लोकतंत्र को ख़तरा है। और इस लोकतंत्र की रक्षा के लिए वे ख़ुद वहाँ अपनी सेना भेजते हैं। अब चूंकि हमारे देश में भी गैस के इस नायाब भंडार का पता चल गया है तो अमेरिका को भारत के लोकतंत्र की फ़िक्र सताने लगी है।”

सूत्रों से पता चला है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सलाहकारों की बैठक कर उनसे ये जानना चाहा है कि भारतीय लोकतंत्र में कितनी ख़ामियाँ हैं। इस बैठक में तय पाया गया कि अभी इंतज़ार किया जाये कि भारत सरकार ये गैस बेचने का ठेका किस कंपनी को देती है। यदि ये ठेका किसी अमेरिकी कंपनी को ना मिला तो ये माना जा सकता है कि भारत मैं लोकतंत्र ख़तरे में पड़ चुका है और वहां की जनता को मदद की ज़रूरत है क्योंकि लोकतांत्रिक व्यवस्था का मतलब ही अमेरिकी हितों की रक्षा करना है।

ट्रम्प जी ने ये उम्मीद भी जताई कि भारत सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था का पालन करेगी और सऊदी सरकार की तरह सारे ठेके अमेरिकी कंपनियों को देकर ये साबित करेगी कि मुल्क पूरी तरह से लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन कर रहा है और वहाँ सभी लोगों को समानता का अधिकार है



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