Monday, 17th December, 2018

चलते चलते

ट्रंप और किम ने सिंगापुर में मिनी एटम बम फोड़कर मनाया दोस्ती का जश्न, सिंगापुर की जनता दहशत में

13, Jun 2018 By Fake Bank Officer

सिंगापुर. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन के बीच आख़िरकार दोस्ती हो ही गयी! इस नयी-नवेली दोस्ती का जश्न मनाने के लिए दोनों नेताओं ने सिंगापुर में कुछ छोटे मोटे परमाणु बम फोड़ कर अपनी खुशी का इज़हार किया है। हालांकि इस आतिशबाज़ी से सिंगापुर मे दहशत का माहौल बन गया है।

Trump-Kim Jong
बम फोड़कर जश्न मनाते ट्रंप और किम जोंग

सिंगापुर के लिटिल इंडिया में पान का ठेला लगाने वाले हमारे संवाददाता ने इस बारे में होटल कापेला के सफाई कर्मचारी टॉम से बात की। टॉम ने अपना नाम और पहचान छुपाने की शर्त पर बताया कि लंच के बाद दोनों नेता टेरेस पर हवा खाने गए थे। आगे का आंखों देखा हाल कुछ इस प्रकार हैः-

उत्सुकतावश टॉम ने दोनों का पीछा किया। उसने देखा कि किम ने अपनी जेब से सीताफल जैसी कोई चीज़ निकाली। ट्रंप को भी शायद यही लगा, इसलिए उन्होंने किम को टोका कि खाने के ऊपर सीताफल क्यों खा रहे हो? इस पर किम ने कहा, “अबे घोंचू, ये मेरा मिनी एटम बम है। आओ, आज अपनी दोस्ती और विश्व शान्ति की स्थापना की खुशी में थोड़ी आतिशबाज़ी करते हैं।”

ट्रम्पः लेकिन इससे तो बहुत तबाही होगी। हमको तो शांति का नोबेल चाहिए ना?

किमः अबे ये बम ज्यादा नुकसान नही करते। हमारे यहाँ के बच्चे भी इसको हाथ में ले के फोड़ते हैं फट्टू!

ट्रम्पः लेकिन तूने तो अपना परमाणु कार्यक्रम बंद कर दिया था ना मोटे?

किम-“हां बंद तो कर दिया है। ये तो थोड़ा यूरेनियम बचा था तो ये पटाखे बना लिए।”

ट्रम्पः पर इसको बिना मिसाइल के कैसे फोड़ेगा?

किम (हँसते हुए): अलीबाग से आया है क्या! कभी दीवाली नही मनाई क्या? ये इधर से आग लगाओ और फेंक दो ऐसे! बोलकर किम ने बम बाजू वाली बिल्डिंग पर फेंक दिया।

फिर एक धमाका हुआ। आसमान धुएँ से भर गया। इमारत की खिड़कियों के शीशे चटक गए। लोग डर के मारे अपने घरों से निकलकर यहाँ-वहाँ भागने लगे। ट्रम्प इम्प्रेस होकर खुशी से बोले, “तुम देखना किम, हमारी दोस्ती खूब जमेगी! तुम बिल्कुल मेरे जैसे ही हो, सनकी और ज़िद्दी!” इस पर दोनों पेट पकड़ कर हँसने लगे।

उधर, सिंगापुर के शांतिप्रिय लोग ये धमाके सुनकर घबरा गए हैं। जनता ने मांग की है कि भविष्य में इन दोनों लफंगों को सिंगापुर ना बुलाया जाये। कहीं ऐसा ना हो कि इनके विश्व शांति के प्रयासों से सिंगापुर की शांति ही भंग हो जाये!



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