Wednesday, 22nd May, 2019

चलते चलते

भारत के चुनाव को प्रभावित करना चाहते हैं पुतिन, बस, कहाँ से शुरू करें समझ नहीं पा रहे

23, Apr 2019 By Ritesh Sinha

मॉस्को. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को अब जाकर पता चला है कि ‘अब आया ऊँट पहाड़ के नीचे’ किसे कहा जाता है। पुतिन चाहते थे कि इस बार भारत के चुनावों को प्रभावित किया जाए ताकि अपने पसंद की सरकार बनवा सकें, अब दिक्कत ये है कि उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि इस अभियान की शुरुआत कहाँ से करें।

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भारत के चुनावों को समझने की कोशिश करते पुतिन

यहाँ का चुनाव इयरफोन की तरह उलझा हुआ है, थक हारकर पुतिन ने अपना आईडिया कैंसल कर दिया है। “हटाओ ये सब! कोई पीएम बने, मुझे कोई लेना-देना नहीं है!” -पुतिन ने मीटिंग के आखिर में कहा।

दरअसल रूस, दूसरे देशों के चुनाव में दखल देने के लिए कुख्यात है लेकिन इंडिया के चुनावों में उसकी एक नहीं चल रही है।

KGB एजेंट्स के साथ हाई-लेवल मीटिंग में जब पुतिन ने रिपोर्ट माँगी तो KGB प्रमुख मिखाइल जेबाबेस्की ने बताया कि, “सर! हमें कुछ समझ नहीं आ रहा है कि कहाँ से शुरुआत की जाए? ममता बैनर्जी बंगाल में कांग्रेस को कोसती हैं, दिल्ली में चुप हो जाती हैं, अखिलेश यादव को पकड़ो तो शिवपाल जी टाँग अड़ा देते हैं!”

“तेजस्वी यादव को देखने लोग आ तो रहे हैं लेकिन ससुरे कहते हैं कि जहाज देखने आए हैं वोट मोदी को ही देंगे! मायावती हमें भाव नहीं देतीं और हम केजरीवाल जी को भाव नहीं देते! अपर कास्ट को पकड़ो तो दलित लोग नाराज़ हो जाते हैं, मिडिल क्लास को पकड़ो तो किसान लोग जंतर-मंतर पर बैठ जाते हैं!” -मिखाइल ने पुतिन को रिपोर्ट किया।

इंडिया के चुनाव को समझने के चक्कर में हमारे तीन एजेंट्स पागल हो चुके हैं, पाँच ने नौकरी छोड़ दी है! ये अमेरिका जैसा नहीं है, किधर से पकड़ें कुछ समझ नहीं आता, ना मुँह दिखाई देता है और ना पूँछ!” -मिखाइल ने अपनी बात पूरी की।

यह सब सुनकर व्लादिमीर झुंझला उठे और सर खुजाते हुए बोले- “बंद करो ये सब, चुपचाप बैठो घर में! मैं ‘मोदी’ को एक अवार्ड पकड़ा दूँगा, इतना काफी है!” -कहते हुए वे उठकर चले गए।



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