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टॉयलेट पेपर की कमी के चलते अमेरिका ने थामा देशी लोटा, इमरान खान ने लोटे की जगह 'हाथ' देने की पेशकश की

16, Mar 2020 By चीखता सन्नाटा

वाशिंगटन. भारतीय ‘नमस्ते’ पर कब्जा करने के बाद अमेरिका ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत की अति-प्राचीन ‘लोटा’ पद्वति को अपनाने का निर्णय लिया है। अमेरिका ने भारत से भारी मात्रा में लोटे आयात करने का आर्डर भी दे दिया है।

लोटा
ये है असली लोटा

देश में टॉयलेट पेपर की भारी कमी की पूर्ति करने में असमर्थ अमेरिका ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में जान डालने की आड़ में यह कदम उठाया है।

पिछले साल के आंकड़ों के अनुसार अमेरिका में प्रति व्यक्ति हर साल 1000 टॉयलेट पेपर रोल की जरूरत पड़ती है।

इस साल कोरोना वायरस के डर के चलते इस संख्या में भारी इजाफा हुआ है, नतीजा ये हुआ कि मार्केट में टॉयलेट पेपर की कमी पड़ गई। पिछले हफ्तें वाशिंगटन में एक टॉयलेट पेपर रोल की कीमत कच्चे तेल के बैरल की कीमत से भी ज्यादा हो गयी थी।

“हालत इतने गंभीर हैं कि टॉयलेट पेपर की बजाय लोग अब प्रतिदिन अख़बार मंगवाने लगे हैं!” -एक अमेरिकी सांसद ने बताया, “लोग अपनी गाड़ियों में पेट्रोल की जगह टॉयलेट पेपर डाल सकते हैं, लेकिन पेट्रोल से टॉयलेट पेपर की कमी पूरी नहीं की जा सकती!”

भारत से लौटने के बाद से अपना प्रेशर रोके बैठे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की हालत इतनी खराब हो गयी कि उन्होंने अपने परममित्र भारत के प्रधानमंत्री मोदी से इस बारे में लंबी बातचीत की और सैंपल के लिए दस-बीस पीस जल्दी भेजने के लिए कहा।

उधर, मोदीजी ने तात्कालिक मदद करते हुए भारत से एक हजार देशी लोटे विशेष विमान से अमेरिका रवाना कर दिये। “मेक इन इंडिया’ के तहत मोदी जी ने अमेरिका को सहायता प्रदान करते हुए देशी लघु उद्योग की भारी मदद की है!” -इस निर्यात से जुड़े एक अधिकारी ने हमें बताया, “हमने अमेरिका को प्रतिवर्ष दो करोड़ लोटे निर्यात करने का लक्ष्य रखा है! भारत की अर्थव्यवस्था को इस कदम से बड़ा बल मिलेगा।”

उधर, सूचना मिली है कि मोदी सरकार का भेजा ‘लोटा’ पाकर ट्रंप पूरे दिन फ्रेश होते रहे। अमेरिका के इस निर्णय से घबराए पाकिस्तान ने घोषणा की है कि इस संकट की घड़ी में हर पाकिस्तानी अपने अमेरिकी भाईयों के साथ खड़ा है।

चूँकि पाकिस्तानी स्वयं ‘बिन पेंदी के लोटे’ हैं इसलिए वो लोटा तो सप्लाई नहीं कर सकते परंतु इमरान खान अपना भीख मांगने वाला कटोरा लोटा तो भेज ही सकते हैं, फिलहाल काम चलाने के लिए या जरूरत पड़ी तो इमरान अपना हाथ भी सर्विस में दे सकते हैं।



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