Saturday, 22nd September, 2018

चलते चलते

होटल का खर्चा सुन चौंके किम जोंग, कहा- "इतना पैसा होता तो अमेरिका पर बम गिरा देते, चर्चा क्यों करते?"

07, Jun 2018 By Fake Bank Officer

प्योंगयांग. उत्तर कोरिया के सनकी तानाशाह किम जोंग उन, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ सिंगापुर में होने वाली मुलाकात को लेकर जहाँ एक ओर उत्साहित हैं, वहीँ दूसरी तरफ फुलर्टन होटल का रोज़ का किराया सुन कर परेशान भी! उन्होंने ट्रिवागो समेत सारी वेबसाइट्स चेक करके देख लीं लेकिन सब जगह उन्हें होटल महंगा ही पड़ रहा है।

हारकर उन्होंने ट्रम्प को फ़ोन लगाया और अपनी परेशानी बतायी। संयोग से उसी समय व्हाइट हाउस में पिज़्ज़ा डिलीवरी करने गए हमारे संवाददाता ने दोनों की बातचीत रिकॉर्ड कर ली। फ़ेकिंग न्यूज़ के पाठकों के लिए दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत का हिंदी अनुवाद प्रस्तुत है-

Trump-Kim-Jong-Un
ट्रंप ने मोटू का खर्चा उठाने से कर दिया इनकार!

किम: हैलो ट्रम्प, मैं ‘किम’ बोल रहा हूँ! केम छो?”

ट्रम्प: हाँ, बोलो बेटा!”

किम: ससुरा होटल तो बहुत महंगा पड़ रहा है, क्या हम किसी सस्ते लॉज में चर्चा नही कर सकते!

ट्रम्प: अरे तुम अमेरिका के राष्ट्रपति से मिल रहे हो ‘द ट्रम्प’ से! अपनी नही तो मेरी इज़्ज़त का तो ख्याल करो!

किम: वो सब तो ठीक है पर अकेला होता तो कोई टैक्स लगा के जनता से वसूल लेता, पर मेरे साथ तो पूरी बारात आ रही है, वही समस्या है!

ट्रम्प: अरे तो आप पूरा मोहल्ला लेकर क्यों आ रहे हो, अकेले आ जाओ एक बॉडीगार्ड के साथ!

किम: वो क्या है ना, ये लोग सिंगापुर घूमना चाहते हैं, फिर कहाँ रोज-रोज बाहर निकलना होता है! समझ रहे हो न आप!

ट्रम्प: हम्म.. फिर क्या किया जाए? वैसे तो अमेरिका तुम्हारा खर्च उठा ले पर उससे तुम्हारे आत्मसम्मान को शायद ठेस पहुँचे!”

किम: अरे भइया कैसा आत्मसम्मान, ससुरा ये क्या होता है? आप हमारा खर्चा उठा लो, तो हमें तो बहुत खुशी होगी!

ट्रम्प: हैलो..हैलो क्या कहा??? तुम्हारी आवाज नहीं आ रही!

किम: अरे हम कह रहे हैं कि हमारा खर्चा भी आप उठा लो..”

ट्रम्प: हैलो…..मोटू तेरी आवाज़ बिल्कुल नही आ रही है! चलो रखता हूँ, सिंगापुर में मिलते हैं फिर! (कहते हुए ट्रम्प ने फ़ोन काट दिया)

बाद में फ़ेकिंग न्यूज़ से बात करते हुए किम जोंग ने बताया कि “इससे बेहतर होता यदि मैं अपना पैसा न्यूक्लियर बम बनाने में खर्च करता, वक्त पर काम तो आता! अब मुझे पुतिन की बात समझ आ रही है, उसने मुझसे कहा था कि पुलिस और अमेरिका की ना दोस्ती भली ना दुश्मनी! अब तो दुनिया भर में शांति के नाम पर चंदा मांगना पड़ेगा! शायद कोई NGO ही हमारा सिंगापुर का टूर स्पॉन्सर कर दे!”



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