Monday, 26th August, 2019

चलते चलते

"बारिश में चंद्रयान-2 लांच मत करना, बादलों में फँस जाएगा!" -मोदीजी ने वैज्ञानिकों को समझाया

21, Jul 2019 By Fake Bank Officer

श्रीहरिकोटा. भारत के दूसरे चंद्रयान मिशन की तैयारियाँ ज़ोर-शोर से चल रही हैं, इसी बीच वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाने और कुछ ज़रूरी टिप्स देने के लिए खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीहरिकोटा जा पहुँचे। वहाँ मोदीजी ने रॉकेट की लॉन्चिंग से लेकर, ‘रोवर’ को चंद्रमा पर उतारने तक, हर विषय पर जमकर ज्ञान दिया। वैज्ञानिकों को भी काम के तनाव भरे क्षणों में कुछ देर मुस्कुराने का मौका मिल गया।

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वैज्ञानिकों को टिप्स देते मोदीजी

श्रीहरिकोटा पहुँचते ही मोदीजी ने आसमान की ओर देखा और वैज्ञानिकों से बोले- “मित्रों..आसमान में बादल मंडरा रहे हैं, कल यदि बारिश का मौसम हो तो ‘चंद्रयान’ लांच मत करना! बेकार में ही यह बादलों से टकराकर चूर-चूर हो जाएगा और 600 करोड़ पानी मे चले जायेंगे!”

मोदीजी की बातें सुनकर वैज्ञानिक भाव-विभोर हो गये। तभी एक युवा वैज्ञानिक बोल पड़ा- “सर ये तो बादलों के ऊपर निकल जाता है! यह सुनकर बाकी वैज्ञानिक उस युवा वैज्ञानिक को पकड़कर खोपचे में ले गए और पूरा खर्चा पानी दे दिया।

पर मोदीजी को इससे कोई फर्क नही पड़ा, वो अपनी धुन में वैज्ञानिकों को समझाते रहे- “बादलों से बच भी गया तो बारिश के पानी से इसका ईंजन खराब हो सकता है, इसलिए मौसम साफ हो तो ही रॉकेट में आग लगाना!” -चाय की चुस्कियाँ लेते हुए मोदीजी बोले।

मोदीजी की बातें सुनकर कुछ वैज्ञानिक हँसते-हँसते लोटपोट हो गए तो कुछ चीख-चीख कर रोने लगे। चाय में बिस्कुट डुबोते हुए उन्होंने अपना आखिरी डायलॉग फ़ेंक दिया- “देखो, रॉकेट का मुँह चंद्रमा की तरफ ही रखना, कहीं ऐसा ना हो कि बोतल टेढ़ी हो जाये और चंद्रयान किसी दूसरे ग्रह पर चला जाये!

मोदीजी की बातों से अब वैज्ञानिकों की हालत पतली हो रही थी, वे सर पीटने से सिर्फ दो कदम दूर थे, तभी मोदीजी का एक बिस्कुट चाय में डूब गया और वे दूसरा पैकेट लाने बाहर चले गए। वैज्ञानिकों ने गेट बंद कर दिया और राहत की साँस ली। “लांचिंग में जो सबसे बड़ी अड़चन थी वो हमने पार कर लिया है!” -एक बड़बोले वैज्ञानिक ने ग्लव्स पहनते हुए कहा।



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