Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

"अगर हिमा दास फ़ुटबॉलर होती तो पहले मैं उसे अंग्रेज़ी सिखाता" -प्रफ़ुल्ल पटेल

14, Jul 2018 By बगुला भगत

मुंबई. वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतने वाली हिमा दास की कमज़ोर अंग्रेज़ी पर प्रफुल्ल पटेल ने अफ़सोस जताया है। ऑल इंडिया फ़ुटबॉल फ़ेडरेशन (AIFF) के अध्यक्ष प्रफ़ुल्ल का कहना है कि अच्छा खेलने से पहले खिलाड़ियों को अच्छी अंग्रेज़ी सीखनी चाहिए।

Hima Das- Prafull Patel
हिमा को अंग्रेज़ी सिखाने का ऑफ़र देते प्रफ़ुल्ल पटेल

छह साल से AIFF के अध्यक्ष पद पर जमे बैठे प्रफ़ुल्ल ने गर्व से छाती चौड़ी करते हुए कहा, “मुझे ही देख लो! मैं आज AIFF का प्रेसिडेंट और एशियन फ़ुटबॉल महासंघ का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हूँ और फ़ीफ़ा की फ़ाइनेंस कमेटी का मेंबर भी हूँ। और ये सब किसकी वजह से है? अच्छी इंग्लिश की वजह से!”

“2012 से मैं इस देश के फ़ुटबॉल प्लेयर्स की अंग्रेज़ी अच्छी कर रहा हूँ क्योंकि मैं खेल से ज़्यादा ध्यान प्लेयर्स की लैंग्वेज पर देता हूँ। टीम में शामिल होते ही मैं उनका इंग्लिश का ट्यूशन शुरु करा देता हूँ। इसी वजह से आज हमारी फ़ुटबॉल टीम दुनिया में 97वें नंबर पर पहुँच गयी है!” -उन्होंने छाती को और फुलाते हुए कहा।

“कहने का मतलब ये है कि अंग्रेज़ी बहुत ज़रूरी है। अब हमारे क्रिकेटरों को ही देख लो! जब उनका टीम में सलेक्शन होता है, उस टाइम उन्हें बिल्कुल भी अंग्रेज़ी नहीं आती लेकिन सलेक्शन के 6 महीने के अंदर-अंदर वे टनाटन अंग्रेज़ी बोलने लगते हैं।”

“यानि वे बैटिंग, बॉलिंग और फ़ील्डिंग से ज़्यादा अपनी अंग्रेज़ी पे ध्यान देते हैं। क्योंकि उन्हें पता होता है कि एक फ़िफ़्टी मारते ही उन्हें टीवी वालों को इंटरव्यू देने पड़ेंगे।”

“तो अगर हिमा दास भी फ़ुटबॉलर होती या मैं उसका कोच होता तो पहले मैं उसे अंग्रेज़ी सिखाता, बाक़ी और कुछ बाद में!” -यह कहकर वो फ़ीफ़ा की मीटिंग के लिए फ़्लाइट पकड़ने एयरपोर्ट रवाना हो गये।



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