Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

"ठंड तो हमारे जमाने में पड़ती थी!" -ऐसा कहने वाले बुजुर्ग को अलाव के पास बैठने नहीं दिया युवकों ने, सुनी दुर्लभ गालियाँ

31, Dec 2019 By Ritesh Sinha

पटना. सत्तर साल के भोलानाथ यादव जी आजकल के नौजवानों पर तंज कसने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देते थे, जब से ठंडी लगी है, उनकी जुबान पर एक ही बात चिपक गयी है कि, “आजकल की ठंड भी कोई ठंड है, ठंडी तो हमारे जमाने में हुआ करती थी, हड्डियाँ जाम हो जाती थीं फिर भी हम चार बजे उठकर दौड़ने जाया करते थे! तुम क्या जानो ठंड किसे कहते हैं?”

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लाल घेरे में भोलानाथ

उनकी यह बातें सुनकर मोहल्ले के जवान लड़के गुस्से से आग-बबूला हो जाया करते थे। उन्हें सौ बार चेतावनी दी गई कि एक ही बात को बार-बार मत दोहराया करो लेकिन भोलानाथ मानने को तैयार नहीं थे, वो तो मौका देखते ही लड़कों को छेड़ दिया करते थे।

लेकिन इस साल की बात कुछ और है, इस बार तो बिहार में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। यही वजह है कि भोलानाथ जी सुबह से अलाव के पास बैठकर जगह घेर लेते हैं और दूसरों को बैठने भी नहीं देते।

सात डिग्री तापमान ने मोहल्ले के लड़कों को बुड्ढे से बदला लेने का मौका दे दिया। उन्होंने आज सुबह आराम से आग ताप रहे भोलानाथ को उसकी कुर्सी सहित उठाकर आग से दूर फेंक दिया। “ठंडी तो तुम्हारे जमाने में पड़ती थी ना, अब यहाँ क्या कर रहे हो? जाओ बाहर जाकर मौसम का आनंद लो!” -राजू मिश्रा ने उसे बाहुबली की तरह उठाते हुए कहा।

जाहिर है भोलानाथ को लड़कों की ये हरकत ज़रा भी पसंद नहीं आई, उसने दुर्लभ प्रजाति की गालियाँ देनी शुरू कर दीं। अपनी छड़ी पटकते हुए कहा- “अबे M%^!^&* कुछ तो शर्म करो! बूढ़े आदमी के साथ मजाक कर रहे हो! मुझे भी बैठने दो अलाव के पास! हाय लगेगी वरना!” -कहते हुए वो ठिठुरते हुए आग के पास आने लगे। इतने में लड़कों ने फिर से उन्हें उठाकर दूर फ़ेंक दिया। मामला गमगीन हो गया। लड़के भोलानाथ की गालियाँ सुनकर हतप्रभ रह गये।

आखिर में भोलानाथ को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने गिड़गिड़ाते हुए कहा- “अब नहीं कहूँगा हरामखोरों! सीनियर सिटीजन की बातों का बुरा मत मानो, मुझे अलाव के पास बैठने दो!” भोलानाथ की हालत देखकर युवकों का दिल पसीज गया और उन्होंने उसे प्राइम-लोकेशन अलॉट कर दिया। भोलानाथ फिर से हाथ-पैर सेंकने लगे।



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