Tuesday, 17th September, 2019

चलते चलते

"आपके यहाँ बारिश हो रही है कि नहीं?" -फोन पे ऐसा पूछना भूला युवक, रिश्तेदारों ने भेजे गुंडे

02, Sep 2019 By Ritesh Sinha

भोपाल. कल देर रात, प्रशांत चौरसिया के घर कुछ गुंडे जबरदस्ती घुस आये और घर में तोड़फोड़ करने लगे। अचानक हुए इस हमले से प्रशांत भौंचक्का रह गया, जब उसने गुंडों को रोकने की कोशिश की तो उन्होंने प्रशांत को भी खोपचे में ले लिया और तबियत से कुटाई कर दी। वह कराहने लगा।

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प्रशांत को कूटते गुंडे

“अबे मार तो रहे हो लेकिन ये तो बता दो मेरी गलती क्या है?” -प्रशांत ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। यह सुनते ही गुंडों के सरदार ने अल्पविराम का एलान किया और प्रशांत के बगल में ही आकर बैठ गये। “तूने कल नागपुर फोन लगाया था ना, अपने मौसा जी के पास!” -गुंडों के कप्तान मलखान सिंह ने पूछा।

“हाँ, लगाया था! पर फोन लगाना कब से गुनाह हो गया?” -प्रशांत ने थोड़ा हिम्मत दिखाते हुए कहा। “जब तूने कल फोन लगाया था तो मौसा जी से पूरे दस मिनट तक बात की, दुनिया भर की बातें कर लीं तूने लेकिन ‘बारिश हो रही है कि नहीं?’ ये तो पूछा ही नहीं!

मौसम के बारे में बात करना जरूरी होता है बेटा! अब तेरा मौसा गुस्से से पागल हो गया है! उसने ही तुझे सबक सिखाने के लिए हमें यहाँ भेजा है ..और लो हम हाजिर हैं!” -मलखान सिंह ने दाँत रगड़ते हुए कहा।

इस बार प्रशांत को अपनी गलती का एहसास हो गया। उसने हाथ जोड़ते हुए कहा- “सच में, बहुत बड़ी भूल हो गई मुझसे! मैं आज फिर से फोन लगाऊँगा और पूरे महीने का वेदर रिपोर्ट लेकर ही फोन रखूँगा!”

मलखान सिंह को इस बार प्रशांत की आँखों में सच्चाई नज़र आई, उसने लापरवाही से कहा- “ठीक है, तुझे माफ़ किये देते हैं लेकिन अगली बार ऐसी गलती नहीं होनी चाहिए, समझे!” -कहते हुए वे अपने गुर्गों को समेटकर चलते बने।

इस घटना के बाद हमने प्रशांत के मौसा कालीचरण से भी बात की। उन्होंने बताया कि, “हम ठहरे मिडिल क्लास के लोग, हमारी बातचीत की शुरुआत ‘बारिश हो रही है कि नहीं?’ टाइप के सवालों से ही होती है!

पर ये अपना लड़का प्रशांत, पता नहीं अपने आप को क्या समझता है, उसने मुझे मौसम के बारे में एक भी सवाल नहीं किया! इसीलिए मैंने किराये का गुंडा उसके घर भेज दिया! कुछ गलत किया क्या?” -कालीचरण ने अपनी बात पूरी की।



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