Friday, 22nd November, 2019

चलते चलते

'नवरात्रि' समाप्त होते ही डिप्रेशन की शिकायत करते नजर आए गुजरात के लोग

14, Oct 2019 By Guest Patrakar

सूरत. नवरात्रि का त्यौहार गुजरात और महाराष्ट्र में किसी दिवाली से कम नहीं होता, ऐसे में हर साल जब नवरात्रि समाप्त होती है तो गुजरात और महाराष्ट्र के लोग अक्सर मायूस हो जाते हैं, उन्हें कुछ छूटा-छूटा सा मह्सूस होने लगता है। सूचना मिली है कि इस साल यह समस्या कुछ ज्यादा ही देखने को मिल रही है।

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गरबा छूटना नहीं चाहिए!

मशहूर मनोवैज्ञानिक कुंदन कटपिटिया ने इस मुद्दे पर एक बड़ी रिसर्च की है, उनके सर्वे की मानें तो 2019 में गुजराती लोग सबसे ज़्यादा नवरात्रि समाप्त होने के कारण डिप्रेशन के शिकार हुए हैं।

उनका कहना है कि, “इस साल मेरे ऐसे कई पेशेंट आये जो नवरात्री ख़त्म होने के बावजूद डांडिया पकड़के घूम रहे थे! दरअसल, उनकी एक शिकायत है कि नवरात्रि के समय उन्हें शोर-गुल करने की परमिशन मिल जाती है, वो रात भर तेज़ धुन में डांस करते हैं और अचानक नवरात्री समाप्त होते ही उन्हें शांत रहना पड़ता है!

ये सन्नाटा उन्हें काटने को दौड़ता है, और वे डिप्रेशन के शिकार बन जाते हैं!” -डॉक्टर कुंदन ने आगे बताया।

हालाँकि ऐसे लोगों के लिए डांडिया क्वीन फाल्गुनी पाठक ने भी कुछ संदेश भेजा है, फाल्गुनी ने कहा है कि, “मैं अपने गुजराती भाई-बहनों से कहना चाहूँगी कि इतनी जल्दी हताश ना हों, मैं भी केवल डांडिया नाइट के वक़्त दिखती हूँ, मुझे तो कोई दिक्कत नहीं हुई!

आप दिवाली, होली, नये साल और यहाँ तक कि किसी के बड्डे पर भी डांडिया पकड़कर नाचा कीजिए मैं भी ऐसा ही करती हूँ, ऐसा करने से माइंड फ्रेश रहता है! ख़ुशी मिलती

फाल्गुनी जी ने तो अपनी राय दे दी है, अब देखते हैं गुजरातियों के लिए यह कारगर साबित होती है या नहीं।



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