Wednesday, 19th December, 2018

चलते चलते

दो साल के चिंटू ने पहली बार देखा एक 'बेवड़ा', पापा से कहा- "हमें उसकी मदद करनी चाहिए!"

13, Nov 2018 By Ritesh Sinha

भोपाल. गुप्ता चाट भंडार में गोलगप्पे दबाते हुए चिंटू ने पहली बार किसी ‘बेवड़े’ के दर्शन किए थे, जो बगल के एक ‘बार’ से अपनी टंकी फुल करवाके निकल रहा था। उस टुन्न शराबी को देखकर दो साल का चिंटू गोलगप्पे वगैरह भूल गया और टकटकी लगाकर उसी को देखने लगा। इतने में उसके पापा समीर आहूजा ने चिंटू से कहा कि, “अरे बेटा, उधर मत देखो! चलो, गोलगप्पे ख़त्म करो, फिर मैं आपके लिए चॉकलेट लूँगा!” अपने पापा की इस अपील को चिंटू ने ऐसे हवा में उड़ा दिया जैसे विजय माल्या, केंद्र सरकार के नोटिस को उड़ा देते हैं। वो बड़े ध्यान से उस शराबी को देखता रहा।

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कौन हैं ये लोग? कहाँ से आते हैं?

“पापा वो क्या है?” -चिंटू ने प्लेट से गोलगप्पा गिराते हुए पूछा। “अरे प्लेट तो ठीक से पकड़ो! उसकी ओर ध्यान मत दो, चलो जल्दी ख़तम करो! वरना मैं अगली बार तुम्हें घुमाने नहीं ले आऊँगा!” इस बार भी समीर की धमकी का बच्चे पर कोई असर नहीं हुआ। समीर अपने आप को ‘केंद्र सरकार’ टाइप फील करने लगा।

“पापा, लगता है उस अंकल को कुछ हो गया है! हमें उसकी मदद करनी चाहिए! वो ठीक से चल भी नहीं पा रहे हैं! मैंने अभी देखा, वो ऐसे… खंभे से टकरा गए थे!” -चिंटू ने पूरी तरह उसकी नक़ल करते हुए बताया।

इस बार समीर ने उनसे प्लेट छीन लिया और गुस्से में बोला- “चलो मैं तुम्हें घर छोड़ता हूँ! बहुत परेशान करते हो आप आजकल!” यह सुनकर चिंटू के अंदर का ‘डोरेमॉन’ जाग गया। उसने भी तैश में आकर कहा- “घर छोड़ने का इतना ही शौक है तो पहले उस अंकल को घर छोड़कर आओ! आप ही तो कहते थे कि हमें दूसरों की मदद करनी चाहिए!”

उसके तेवर देखकर समीर माथा पकड़कर बैठ गया। “अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊँ? बेटा वो बिल्कुल ठीक है, उस पर ध्यान मत दो!” -कहते हुए समीर ने चिंटू का चेहरा पकड़कर अपनी ओर घुमा लिया। इसी बीच वह बेवड़ा सामने पड़ी कुर्सी में बैठते हुए कुर्सी सहित गिर चुका था। चिंटू यह देखकर रोने लगा।

तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति ने समीर को सलाह दी कि “इसके मम्मी को बुलवा लो! वो मना-बुझाकर ले जाएगी! तेरे बस की बात नहीं है!” उनकी सलाह मानते हुए समीर ने अपनी पत्नी को फोन करके बुलाया, तब कहीं जाकर चिंटू स्टेशन छोड़ने को राजी हुआ।



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