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ठेके पर खड़े दो शराबियों ने बना ली कोरोना की वैक्सीन, पेटेंट की अर्जी भी डाली

10, May 2020 By Fake Bank Officer

गुरुग्राम. ठेके पर जब दो शराबी मिलते हैं तो वो सिर्फ एक दूसरे का हाल-चाल नहीं पूछते बल्कि देश और दुनिया की समस्याओं पर भी चिंतन-मनन करते हैं। पहले भी शराब की दुकानों पर आतंकवाद से लेकर ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं पर सार्थक चर्चा होती रही है और रचनात्मक समाधान भी निकाले गये हैं। चूंकि इस समय दुनिया की सबसे बड़ी समस्या ‘कोरोना’ है अतः यह स्वाभाविक ही है कि अलग-अलग ठेकों से कोरोना पर अलग-अलग सुझाव आ रहे हैं।

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लाल घेरे में मगन और छगन

पिछले 40 दिनों से शराबी समुदाय, अपने-अपने घरों में बंद था और अपना ज्ञान लोगों तक डिलीवर नही कर पा रहा था।

यही वजह है कि जब सरकार ने शराब की दुकानें खोलने का फैसला किया तो वे सभी शराबी, दारू खरीदने और अपना ज्ञान पेलने उमड़ पड़े।

सबसे बड़ी उपलब्धि छगन और मगन नाम के दो धुरंधर बेवड़ों के हिस्से में आई जिन्होंने ठेके की लंबी कतार में सिर्फ बातें करते हुए कोरोना की वैक्सीन बना डाली।

विशेषज्ञों की राय है कि अगर ये दोनों बेवड़े, एक घंटे और लाइन में खड़े रहते तो ‘यूरेनियम’ पिघलाकर परमाणु बम बनाने की तकनीक भी अवश्य ढूँढ निकालते।

शराब की दुकान की लाइन में अपनी बारी की प्रतीक्षा करते हुए पहले तो उन्होंने कोरोना की उत्पत्ति पर एक घंटे बहस की और तीसरे विश्वयुद्ध की संभावना पर जोर दिया। अंत मे जाकर उन्होंने कोरोना की वैक्सीन पर रिसर्च की।

क्लोरीन, मीथेन और बेकिंग सोडा जैसे रासायनिक तत्वों के अद्भुत मिश्रण पर चर्चा करते हुए वो इस नतीजे पर पहुँचे कि इस बीमारी की वैक्सीन बनाना कोई बड़ी बात नहीं है, कोरोना तो आसानी से ठीक हो सकता है।

बस फिर क्या था, शराब की लाइन वहीं पर छोड़, दोनों अपने अविष्कार का पेटेंट करवाने चल दिये। अन्य शराबियों ने उन्हें समझाया कि पहले इस खोज को किसी मरीज पर टेस्ट करके तो देख लो, पर वे नही माने।

जो पहला सरकारी दफ्तर उन्हें मिला, वहीं जाकर पेटेंट की अर्जी डाल दी। हालाँकि वहाँ बैठे सरकारी बाबू ने उन्हें काफी समझाया कि यह पोस्ट आफिस है यहाँ ‘पेटेंट’ जारी नही होते पर छगन और मगन ने एक नहीं सुनी और जबरन एप्लीकेशन दे कर वहाँ से भाग आये।



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