चलते चलते

आर्मी के टैंक में सवार होकर अंग्रेजी शराब की दुकान लूटने पहुँचे रवि शास्त्री, कई टन माल लेकर फरार

05, May 2020 By Ritesh Sinha

एजेंसी. मुंबई के एक अंग्रेजी शराब की दुकान के सामने उस समय भगदड़ मच गई जब अचानक जमीन हिलने लगी और लोग कांपने लगे। दारू खरीद रहे लोगों को समझने में देर नहीं लगी कि इलाके में भूकंप आया है, अतः सभी किसी मजबूत चीज को पकड़कर अपनी जान बचाने लगे।

shastri
माल लूटकर ले जाते शास्त्री

हालाँकि उनका अंदाजा सौ प्रतिशत गलत था, धरती भूकंप की वजह से नहीं बल्कि रवि शास्त्री की वजह से हिल रही थी। कोच महोदय उस समय भारी-भरकम टैंक में सवार होकर ठेके की तरफ ही आ रहे थे।

दरअसल, दारू की बिक्री शुरू होते ही ठेके के सामने हजारों की भीड़ देखी जा रही है, शास्त्री को लगा कि लाइन में लगकर ‘माल’ का जुगाड़ करना तो बहुत मुश्किल हो जाएगा इसलिए उन्होंने, पूरा ‘ठेका’ लूटने के उद्देश्य से आर्मी के टैंक में सवार होकर हमला कर दिया।

भीमकाय टैंक को अपनी ओर आता हुआ देखकर लोग इधर-उधर भागने लगे, दो मिनट में ही पूरा इलाका मनुष्य-विहीन हो गया। दुकान के सामने आते ही शास्त्री ने टैंक का बैरल, दारू विक्रेता की ओर घुमाया और इशारा किया- “माल देते हो या एकाध राउंड फायर करूँ?”

चूँकि दुकानदार समझदार था इसलिए उसने बिना देरी किये सारा माल टैंक के पिछले वाले हिस्से में रखवा दिया। एक बोतल वहीं पर ‘नीट’ मारते हुए शास्त्री ने माल की क्वालिटी को चेक किया और पहली फुर्सत में सारा माल लेकर फरार हो गया।

टैंक की गड़गड़ाहट से एक बार फिर, पूरा इलाका थर्रा उठा। शास्त्री जैसे ही कुछ दूर गये, इधर सैंकड़ों की भीड़ ने फिर से दुकान को घेर लिया। लोग अपने-अपने हिस्से की दारू दुकानदार से मांगने लगे। गद्दीदार भाटिया जी ने सबको समझाते हुए कहा कि, “देखिए! यहाँ डाका पड़ा था, अभी-अभी जो साब टैंक में सवार होकर आये थे वो सारा माल लेकर फरार हो गए हैं! दुकान में कुछ नहीं है, अपने-अपने घर चले जाइये, एक पौव्वा तक नहीं छोड़ा कमीने ने!” -कहते हुए भाटिया जी भावुक हो उठे।

हालाँकि अब तक ये स्पष्ट नहीं हुआ है कि ‘शास्त्री’ को आर्मी का टैंक आखिर मिला कहाँ से, फिर भी पुलिस जाँच कर रही है।



ऐसी अन्य ख़बरें