Friday, 10th April, 2020

चलते चलते

पीएम मोदी के 'थाली बजाने' के आग्रह का ‘मम्मी समुदाय’ ने किया विरोध, दी आंदोलन की चेतावनी

20, Mar 2020 By किल बिल पांडे

नयी दिल्ली. गुरुवार का दिन कोरोना वायरस से जूझ रहे देश के लिए अच्छे-बुरे हर तरह के  पल लेकर आया। पहले से ही कोरोना के कारण डर के माहौल में जी रहे देशवासियों को, बिना मांगे ही ढिन्चैक पूजा ने अपने नए गाने ‘कोरोना सॉन्ग’ की सौगात दे दी।

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थाली बजाने के खिलाफ एकजुट मम्मी समुदाय

सुरों के साथ हुई इस भयंकर छेड़खानी से धराशायी हुई जनता को उबारने का ज़िम्मा, पीएम मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन पर आन पड़ा। जिसे उन्होंने बखूबी निभाया भी। लेकिन प्रधानमंत्री के इस संबोधन में किये गए आग्रहों ने, नया बखेड़ा खड़ा कर दिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में देशवासियों से, मेहनतकश तबके के लिए धन्यवाद स्वरुप, अपने-अपने घरों में 22 मार्च को शाम पांच बजे, थाली, ताली या घंटी बजाने का आग्रह किया है। लेकिन अब यही आग्रह, उनके लिए परेशानी का सबब बनता नज़र आ रहा है।

खबर है कि मोदी जी के इसी आग्रह पर देशभर के ‘मम्मी समुदाय’ ने गहरी आपत्ति जताई है। देश के प्रख्यात ‘अखिल भारतीय मम्मी संगठन’ ने मोदी जी के संबोधन के बाद, अपने ट्विटर अकाउंट पर प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस मांग का जोरदार विरोध किया है।

आलू छीलने की शर्त पर टेलीफोन पर, अपनी राय देने को तैयार हुई संगठन की सेक्रेटरी, सुषमा प्रधान ने फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया कि- “देखिये! एक तो हम दिनभर, बच्चों को साम, दाम, दंड, भेद, चप्पल, बेलन, झाड़ू आदि  हर तरीके से सुधारने में लगे रहते हैं, ऊपर से मोदी जी ने ऐसा ऐलान कर दिया। थाली बजाना हमारे यहाँ जन्म से ही वर्जित माना गया है, सब मम्मीयों को पता होता है कि खाली थाली बजाना, खाने का अपमान करना है!”

“याद नहीं, ‘मिस्टर इंडिया’ में बच्चों ने कैलेन्डर के नाक में दम करने के लिए कैसे थालियाँ  बजाई थी, तभी तो बाद में पूरे परिवार को खाने के लाले पड़ गए थे, और कितने सबूत दूँ आपको?

अब मोदी जी ऐसी हरकतों को बढ़ावा देंगे तो कैसे चलेगा? इसलिए ताली, घंटी तक तो ठीक है, पर यह थाली वाला ‘क्लॉज़’ हटाने के लिए हम आंदोलन का सहारा भी लेने का सोच रही हैं!” -कहते हुए  सुषमा जी ने डेली सोप के एपिसोड देखने की बात कह फ़ोन पटक दिया।

सूत्रों के मुताबिक, हालात को देखते हुए सभी मम्मीयां ‘वर्क फ्रॉम होम’ कर घर से ही इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का सोच रही हैं।



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