Wednesday, 18th September, 2019

चलते चलते

पॉलीथीन को सीने से लगाकर रो पड़ी महिला, फेंकने जा रहा था पति

03, Jul 2018 By बगुला भगत

मुंबई. अपनी किसी प्रिय चीज़ से बिछड़ने का ग़म क्या होता है, ये कोई दादर में रहने वाली नंदिनी से पूछे, जिसे कल अपनी प्यारी पॉलीथीन्स से जुदा होना पड़ गया। उसके पति ने कल घर में रखी सारे पॉलीथीन बैग्स को उठाकर डस्टबिन में फेंक दिया और नंदिनी रोती रह गयी।

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पॉलीथीन से बिछड़ने पर बिलखती नंदिनी

मोहल्लेवालों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, उसका पति संदीप कल शाम ऑफ़िस से आया और किचन से, अलमारी से, बेड के गद्दे के नीचे से, सब जगह से ढूँढ-ढूँढकर नंदिनी का छुपा हुआ ‘पन्नी-ख़ज़ाना’ निकाल लिया और फेंकने चल दिया।

अपनी बरसों की संजोई पॉलीथीन को जाता देख नंदिनी का कलेजा फट पड़ा! ‘पेन्टालून’, ‘शॉपर्स स्टॉप’, ‘बिग बाज़ार’…एक से बढ़कर एक ब्रांड की पॉलीथीन! उसने दौड़कर संदीप को रोक लिया और उसके हाथ से पॉलीथीन छीनकर उन्हें ऐसे निहराने लगी, जैसे अपने बच्चों को देख रही हो।

“वो ‘शॉपर्स स्टॉप’ वाली तो कितनी मजबूत थी, उसमें कुछ भी सामान लेकर चल पड़ो, कभी नहीं फटती थी और लगती भी कितनी अच्छी थी…एकदम ब्रांडेड!” -नंदिनी ने भर्राये गले से हमारे रिपोर्टर को बताया।

उधर, उसके पत्थरदिल पति मोहित का कहना है कि मुंबई में पॉलीथीन पर बैन लगने के बाद उसे घर में रखना भी अपराध हो गया है, इसलिए वे उसे मजबूरी में फेंकनी पड़ीं। लेकिन नंदिनी उसकी एक सुनने को तैयार नहीं है। वो सुबकते हुए यही कहे जा रही है- “क्या इंडिया में ऐसा कोई भी काम नहीं होता, जिस पे बैन लगा हुआ है! क्या सारा क़ानून मेरी पन्नियों के लिए ही बना है?”



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