चलते चलते

बंदरों ने सुप्रीम कोर्ट में PIL डालकर पूछा- "कहाँ चले गये सारे इंसान, आजकल नजर नहीं आ रहे?"

27, Mar 2020 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. इक्कीस दिन का लॉकडाउन घोषित होने के बाद सड़कों पर वीराना सा छा गया है, इंसान तो बाहर निकल नहीं रहे, सो कुत्ते बीच सड़क पर बैठकर फैमिली मीटिंग कर रहे हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट में एक अजीब सी ‘कपिहित’ याचिका दायर की गई है जिसमें पूछा गया है कि “सारे ‘हुमंस’ कहाँ चले गये? आजकल नजर नहीं आ रहे? हमें स्थिति से अवगत कराया जाए?”

monkeys

कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई भी हो रही है, बंदरों की ओर से दलील दे रहे उनके वकील मंकी लाल ने अपनी बात मजबूती से रखते हुए कहा कि, “मी लार्ड! जब तक हम इंसानों का चेहरा ना देख लें हमें चैन नहीं मिलता! लेकिन पिछले कुछ दिनों से कोई नजर ही नहीं आ रहा है! बस बंद है और ट्रेन भी!

ना कोई ऑफिस जा रहा है और ना कोई ऑफिस से आ रहा है, यहाँ तक कि ठेका भी बंद है, ऐसा तो कभी नहीं हुआ, ये मनुष्य हमें बिना बताये कहीं निकल तो नहीं लिए?” -मंकी लाल ने जज से पूछा।

केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित हुए वकील नकुल रोहतगी ने मंकी लाल को समझाते हुए कहा कि, “देखिए! आप अपना PIL वापस ले लीजिये, दुनिया में नया वायरस आया है, मानव जाति 21 दिन तक घरों में कैद है!

पर  आप चिंता मत कीजिये, हम निपटे नहीं हैं, 21 दिन बाद फिर से बाहर निकलेंगे और एक मुट्ठी चने के नाम पर तुम्हारी छाती पर मूंग दलेंगे! आप धैर्य रखिए!” -रोहतगी ने मंकी लाल को समझाते हुए कहा।

सरकारी वकील की ओर से उचित जवाब पाकर मंकी लाल जी निश्चिन्त हो गए और उन्होंने अपना PIL वापस ले लिया। “यही बात हमें पहले से बता दी जाती तो हमें अदालत का दरवाजा खटखटाना ही नहीं पड़ता! कम्युनिकेशन गैप नहीं होना चाहिए!” -मंकी लाल ने अपना पिछवाड़ा खुजाते हुए कहा।



ऐसी अन्य ख़बरें