Saturday, 17th November, 2018

चलते चलते

दोस्त का पॉकेट मारकर बैंक में पैसे जमा कराने पहुँचा युवक, मिनिमम बैलेंस मेन्टेन करने का था दबाव

07, Aug 2018 By Ritesh Sinha

भोपाल. गाँधी नगर में रहने वाले एक युवक ने अपनी हरकत से ‘दोस्ती’ के रिश्ते को उस समय  तार-तार कर दिया, जब उसने अपने ही दोस्त का पॉकेट मारकर उसके पैसे चुरा लिए। आरोपी युवक का नाम जतिन चोपड़ा है, और उसके दोस्त का नाम ‘मोहित’ बताया जा रहा है। दरअसल, मोहित अपने जिगरी दोस्त से मिलने उसके घर आया था, दोनों ने देश की समस्याओं पर खुलकर चर्चा की थी। इसी बातचीत के दौरान जतिन ने अपने दोस्त का वॉलेट पार कर दिया। मोहित को भनक तक नहीं लगी।

pickpocket
मोहित का वॉलेट पार करता जतिन

अब प्रश्न यह उठता है कि जतिन ने यह चोरी क्यों की? दरअसल, वह अपने बैंक खाते को लेकर परेशान रहता था, क्योंकि उसके बैंक वाले मैसेज भेज-भेजकर एकाउंट में मिनिमम बैलेंस रखने के लिए परेशान किया करते थे। उसका IBIBI बैंक में एक खाता था, जो सिर्फ दिखाने के काम आता था, कि मेरा भी बैंक में खाता है। कभी भी उसके एकाउंट में छः हज़ार रुपये से ज्यादा नहीं होते थे, ऊपर से मिनिमम बैलेंस का झंझट। बस, इन्ही सब कारणों ने एक भोले-भाले युवक को चोरी करने के लिए मजबूर कर दिया।

मोहित के जाने के बाद जतिन खोपचे में गया और वॉलेट चेक करने लगा कि कितना माल हाथ लगा है। उसकी किस्मत अच्छी थी, वॉलेट में दो-दो हज़ार रुपयों के आठ करारे नोट आराम फरमा रहे थे, जिसे जतिन ने अपने कब्ज़े में ले लिया। जाहिर है उसने यह महान कार्य अपना मिनिमम बैलेंस वाला झंझट दूर करने के लिए ही किया था, इसलिए उसने तुरंत बाइक निकाली और बैंक पहुँच गया। अपने एकाउंट में दस हज़ार रुपये डाले और घर पर आकर चादर तानकर सो गया।

हालाँकि, कुछ देर बाद जब मोहित को पता चला कि उसका पॉकेट मार लिया गया है तो वह सीधे जतिन से पूछने आ गया। जतिन ने साफ़-साफ़ कह दिया कि उसने लाल रंग का वॉलेट तो पूरी ज़िन्दगी में नहीं देखा है, सिर्फ भूरे रंग का देखा है।

मोहित को भी अपने दोस्त की बात माननी पड़ी, उसने निराश होते हुए कहा- “तू ऐसी हरकत नहीं कर सकता यार! तू तो मेरा दोस्त है! तुम्हारे घर से निकलते ही मैं सिगरेट पीने चला गया था, लगता है वहीँ पर किसी भीखमंगे ने हाथ साफ़ कर दिया!” -कहता हुआ वह पान शॉप वाले को गालियाँ बकने लगा।



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