Wednesday, 19th December, 2018

चलते चलते

कानपुर के युवक ने गुटखा थूकते हुए अपनी शर्ट पर लगा लिया दाग़, सौ साल में एक बार होती है ऐसी ग़लती

05, Dec 2018 By Ritesh Sinha

कानपुर. माना जाता है कि यूपी वाले गुटखा खाने के मामले में इतने एक्सपर्ट हो गए हैं उनसे गुटखा थूकते समय कोई गलती हो ही नहीं सकती। चाहे बदसूरत दीवारों पर ख़ूबसूरत चित्रकारी करना हो या दो आदमियों के बीच से पिचकारी मारना हो, उनका निशाना चूक ही नहीं सकता। गुटखा ठीक उसी जगह पर जाकर गिरता है जहाँ उसे लैंड करने का आदेश दिया जाता है। लेकिन एक चौंका देने वाली घटना में एक युवक अपनी पीक पर काबू नहीं रख पाया और अपनी ही कमीज गंदा कर बैठा।

gutakha
गुटखा खाता मनोज

आरोपी युवक का नाम मनोज बताया जा रहा है, जिसके मलमल के कुर्ते पर छींट लाल-लाल बन गए हैं। इस घटना से सारा शहर सदमे में है और मनोज पर थू-थू कर रहा है। लोगों का कहना है कि मनोज ने इस शहर का और गुटखा खाने वालों की कला का अपमान किया है।

समाज वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी गलती सौ साल में सिर्फ एक बार ही होती है। इससे पहले ऐसी घटना सन् 1918 में हुई थी, जब कानपुर के ही एक क्रांतिकारी युवक ने गलती से मुँह का गुटखा एक अंग्रेज़ के मुँह पर थूक दिया था। बाद में वह युवक महान क्रांतिकारी ‘राजश्रीं के नाम से प्रसिद्द हुआ। इस घटना के सौ साल बाद इतिहास ने अपने आप को फिर से दोहराया है और कानपुर का ही एक युवक गुटखा थूकते समय गलती कर गया और अपनी ही कमीज को गंदा कर बैठा।

आखिर मनोज निशाना कैसे चूक गया? यह जानने के लिए हमने सीधे मनोज से बात की, उसने बताया कि, “पता नहीं ये कैसे हो गया, मैंने तो पीक सामने वाली दीवार पर ही मारी थी! ठीक से प्रेशर नहीं बन पाया और गुटखा मेरी ही कमीज पर गिर गया!” -कहते हुए मनोज अपनी शर्ट दिखाने लगा।

“पिछले बीस सालों से गुटखा चबा रहा हूँ भाईसाब! ऐसी गलती आज तक नहीं हुई थी! जिस एंगल से पिचकारी मारता हूँ, ‘पीक’ उसी एंगल से जाकर जमीन से टकराती है, पता नहीं कैसे इस बार Deviation हो गया!” -मनोज ने अपना माथा पकड़ लिया। उधर, रविवार को गुटखा खाने वालों की एक मीटिंग बुलाई गई है जहाँ पर मनोज को क्या सजा दी जाए, इस पर बहस होगी।



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