Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

बाहर हंगामा करने की बजाय लैब में रिसर्च कर था JNU का छात्र, माँ-बाप ने घर वापस बुलाया

06, Jan 2020 By Ritesh Sinha

मुनीरका. सुमीत नागपाल, JNU का छात्र होने के बावजूद कल रात को ना वो हंगामा कर रहा था और ना ही अपने दोस्तों को बाहर से बुला रहा था! बल्कि वो तो ‘लैब’ में आराम से बैठकर कैंसर की दवा ढूँढने में लगा था! यही बात उनके पैरेंट्स को इतनी बुरी लगी कि उन्होंने सुमीत को घर बुला लिया है। सुमीत के माँ-बाप को लगता है कि माइक्रोस्कोप में डूबा हुआ लड़का क्या उन्नति करेगा इसलिए उसे पढ़ाने से कोई फायदा नहीं है।

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अपनी रिसर्च में ध्यान देता सुमीत

बताया जा रहा है कि सुमीत ने तीन अन्य छात्रों को बहला-फुसलाकर इस गोरखधंधे में शामिल कर लिया था, उन्हें भी उनके पैरेंट्स ने वापस बुला लिया है।

दरअसल, कल रात को JNU में जमकर हंगामा हुआ है, कुछ नकाबपोश लोगों ने JNU में हमला कर दिया और छात्रों और शिक्षकों से मारपीट की। बाद में यूनिवर्सिटी के छात्र दो गुटों में बँट गये और हंगामा करने लगे लेकिन सुमीत अलग ही मिट्टी का बना है, उसे इन सबसे कोई लेना-देना नहीं था!

टीवी पर हंगामा देखकर सुमीत को उसके पापा का फोन आया, उन्होंने पूछा कि ‘तू कहाँ है?’ तो उसने जवाब दिया कि, “लैब में हूँ, रक्त कोशिकाओं की जाँच में सर खपा रहा हूँ!’

इतना सुनते ही उनका मूड खराब हो गया। उन्होंने कहा- “क्या यही करने के लिए पढ़ने भेजा था तुझे? सब लोग टीवी पर आ रहे हैं और ये साब पढ़ने-लिखने बैठे हैं! कुछ तो सीखो!”

इतनी डाँट खाने के बाद भी सुमीत के कानों में जूँ तक नहीं रेंगी और वो परखनली ही चेक करता रहा। बाद में घरवालों का फिर से फोन आया और उन्होंने सुमीत को बोरिया-बिस्तर बांधकर वापस आने का आदेश सुना दिया।

JNU के शुभचिंतकों ने भी सुमीत के व्यवहार की कड़ी निंदा की है। महान समाजशास्त्री जोगेंद्र जाधव ने कहा कि, “सुमीत जैसे लोग ऐसी अलोकतांत्रिक चीजें करके JNU का माहौल खराब कर रहे हैं, ये JNU की मर्यादा के खिलाफ है, हम इसकी घोर निंदा करते हैं! देखिए ना, मुझे अंदर भी जाने नहीं दिया जा रहा है, ये तानाशाही नहीं तो और क्या है?



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