Friday, 22nd November, 2019

चलते चलते

शैम्पू, मग्गा और बाल्टी पकड़के 'बाइक' धोने पर ही मिडिल क्लास युवक को यकीन हुआ कि 'दिवाली' आ गयी है!

26, Oct 2019 By Ritesh Sinha

भोपाल. घर की साफ़-सफाई भी कर ली, शॉपिंग भी कर लिया और पटाखे भी ले लिये, लेकिन संदीप तांबे को यकीन ही नहीं हो रहा था कि  दिवाली सच में आ गयी है, वो हर घंटे एक ही बात कहता- ‘यार इस साल मज़ा नहीं आ रहा है!’

bike-wash

कुछ लोगों ने उसे सोनपापड़ी का डिब्बा खरीदने की सलाह दी, संदीप ने वह भी करके देख लिया पर कोई फायदा नहीं हुआ! उसे अब भी कुछ छूटा-छूटा सा महसूस हो रहा था!

संदीप के दिमागी हालत की जानकारी जब उसके पिताजी मि. तांबे को पता चली तो उन्होंने उसे दिवाली वाली फीलिंग देने का सारा बोझ अपने कंधे पर ले लिया!

उन्होंने आज सुबह-सुबह संदीप से कहा- “बाइक, स्कूटी वगैरह अच्छे से धो देना, फिर साल भर तो चलाना ही चलाना है!”

इतना सुनते ही संदीप झुंझला उठा, उसे पहली बार लगा कि दिवाली सच में आ गयी है, उसने अपने पापा से कहा- “इस दुनिया में ‘ऑटो सर्विसिंग’ नाम के जीव भी रहते हैं, क्यों ना उनका फायदा उठाया जाए?”

“तू क्या करेगा दिन भर? मोबाइल में घुसा रहेगा? शैंपू, मग्गा और बाल्टी पकड़के काम में लग जा, आज शाम तक गाड़ी चकाचक दिखनी चाहिए मुझे?” -मि. तांबे ने खा जाने वाली अंदाज़ में कहा।

अब संदीप के पास कोई चारा नहीं था, उसने घुटनों तक आने वाला पैंट पहना और शैंपू, मग्गा, बाल्टी लेकर गाड़ियों की ‘त्वचा’ चमकाने लगा।

इस घटना के बाद संदीप ने एक बार भी नहीं कहा है कि दिवाली जैसी फील नहीं आ रही है! क्योंकि उसे पता है कि घरवालों को ‘दिवाली’ फीलिंग करवाने के सैकड़ों तरीके आते हैं।



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