Monday, 17th December, 2018

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मकान मालिक को हुआ अल्जाइमर रोग, फिर भी एक तारीख को किराया माँगना नहीं भूला

29, Sep 2018 By Ritesh Sinha

भोपाल. एरिया कॉलोनी में रहने वाले दुग्गल साब, सिंचाई विभाग में सरकारी ‘बाबू’ हुआ हुआ करते थे, यही वजह है कि महँगा होने के बावजूद उन्होंने पॉश कॉलोनी में अपने लिए चार मंज़िला इमारत ‘सींच’ ली थी। घर की एक मंज़िल पर वो खुद रहते थे और बाकी तीन को उन्होंने किराये पर चढ़ा रक्खा था। दुग्गल साब एक नंबर के कंजूस थे और पहली तारीख को गालियाँ देकर किराया वसूलने में उन्हें बहुत मज़ा आता था।

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पैसा गिनते दुग्गल साब!

पिछले दिनों दुर्भाग्यवश उन्हें अल्जाइमर का रोग हो गया, लेकिन यह बीमारी भी उन्हें किराया वसूलने से नहीं रोक पाई। हद तो तब हो गई जब  ठीक एक तारीख को वो किराया वसूलने निकल पड़े और सबसे पैसा वसूलकर बगल वाले शर्मा जी के घर घुस गए।

“अरे! आप यहाँ कहाँ घुसे चले आ रहे हैं? आपका मकान उधर है!” -शर्मा जी ने उन्हें याद दिलाते हुए कहा। उनके याद दिलाने पर ही दुग्गल साब को अपनी गलती का एहसास हुआ। “बहुत-बहुत धन्यवाद गुप्ता जी! आपने याद दिला दिया! भूल जाता हूँ, क्या करूँ बीमारी ही ऐसी है!” -कहते हुए वो थूक लगाकर नोट गिनने लगे।

“मेरा नाम रामचरण शर्मा है, गुप्ता नहीं! गुप्ता जी यहाँ से दो गली छोड़कर रहते हैं!” -शर्मा जी ने उन्हें सुधारते हुए कहा। “..तो मैंने कब आपको ‘गुप्ता’ कहा!” –दुग्गल साब घर से बाहर निकलते हुए बोले। शर्मा जी पीछे दांत पीसते रह गए।

डॉक्टरों का मानना है कि मकान मालिकों को किराया माँगने में जितनी ख़ुशी मिलती है वो कहीं नहीं मिलती, इसीलिए दुग्गल साब, भूलने की बीमारी होने के बावजूद किराया माँगना नहीं भूले!  जो आदमी अपने जमाने की हीरोइन, वैजयंती माला और मधुबाला की फोटो भी नहीं पहचान पाता, उसे किराया वसूलते हुए देखकर लोग भौंचक्के रह गए।

उनके मकान में किराया देकर रहने वाले एक युवक मोहित ने बताया कि “वैसे तो किसी की बीमारी का मज़ाक नहीं उड़ाना चाहिए लेकिन ये दुग्गल तो शुरू से ही बहुत कंजूस है! साला एक दिन भी देरी सहन नहीं करता था! हम लोग तो सोच रहे थे कि इस बार वो रेंट माँगना भूल जाएगा, लेकिन वो तो आज ही टपक पड़ा!



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