Friday, 19th October, 2018

चलते चलते

हैदराबाद जाकर भी पैराडाइज़ में बिरयानी नहीं खायी पुणे के युवक ने, अब बिरयानी में आ रहा टिण्डे का स्वाद​

20, Jun 2018 By Vish

एजेंसी. पुणे के एक युवक राहुल सैनी के साथ एक ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है, जो आपने पहले ना कभी देखी होगी और ना कभी सुनी होगी। उसके टेस्ट-बड्स यानि ज़बान से बिरयानी का स्वाद कहीं खो गया है। अब वो कितनी भी अच्छी बिरयानी खा ले, उसे बिरयानी का स्वाद आता ही नहीं! उसे लगता है, जैसे वो बिरयानी नहीं, टिण्डे या लौकी की सब्जी खा रहा हो!

Tinda-Taste-in-Mouth
डॉक्टर को अपनी जीभ दिखाता राहुल

दरअसल, राहुल दो हफ़्ते पहले 3 दिन के टूर पे हैदराबाद गया था। वहाँ वो हर जगह घूमा, सब कुछ किया पर जब बिरयानी खाने की बात आयी तो उसने पैराडाइज़ ना जाकर अपने होटल के पास ही एक छोटे से रेस्टोरेंट में जाकर खा ली। बस यहीं सब कुछ गड़बड़ हो गया।

जब वो पुणे वापस लौटा तो 3-4 दिन तक तो सबकुछ नाॅर्मल रहा पर चौथे दिन जब वो दोस्तों के साथ पार्टी करते हुए बिरयानी खा रहा था, तो पहला निवाला लेते ही उसे कुछ अजीब सा लगा। बिरयानी की जगह उसे टिण्डे की सब्ज़ी का स्वाद आया। उसने हिम्मत करके 2-4 निवाले और खाये पर अब तो स्वाद के साथ-साथ बिरयानी से टिण्डे की महक भी आने लगी।

उसने फ़ौरन वेटर को बुलाकर कहा, “ये क्या मज़ाक है?” वेटर और उसके दोस्त उसकी तरफ़ हैरानी से देखने लगे तो राहुल बोला, “तुमसे चिकन बिरयानी मंगवायी थी तो ये टिण्डे की सब्ज़ी क्यूँ दिये हो?” यह सुनकर वेटर ने मुस्कुराते हुए कहा, “मज़ाक तो आप कर रहे हो सर, वो भी रश टाइम पे!” और दूसरे कस्टरमर्स से ऑर्डर लेने चला गया।

फिर उसके दोस्तों ने उसे बताया कि “यार बिरयानी का टेस्ट नाॅर्मल है!” यह सुनकर राहुल वहाँ से बड़बड़ाता हुआ निकल गया और ‘हैदराबाद हाउस’, ‘रेड्डीज़’, ‘ब्लू नाइल’ जैसे पुणे के कई फ़ेमस रेस्टोरेंट्स में हैदराबादी बिरयानी खाकर देखी पर कहीं उसे टिण्डे की सब्ज़ी का स्वाद मिला तो कहीं करेले का!

आख़िर में राहुल हताश होकर डाॅक्टर मिथिलेश भट्ट के पास गया। उसकी कहानी सुनते ही डाॅक्टर साब हँसने लग गये। उन्हें हँसता देख राहुल ने गुस्से से पूछा कि वो हँस क्यों रहे हैं? इस पर डाॅक्टर साब ने गले से आला निकालकर साइड में रखा और अपना एपरन उतारते हुए बोले, “अरे भाई, बिरयानी के गढ़ में जाकर भी अगर तुम बिरयानी के मक्के पर मत्था टेक कर नहीं आओगे तो देवता गण नाराज़ होंगे कि नहीं?”

“मतलब?” राहुल घबराते हुए बोला तो डॉक्टर साब ने कहा, “मतलब ये कि तुम्हें अब कभी भी बिरयानी का टेस्ट नहीं मिलेगा। इसे ‘पैराडाइज़-रुष्टम-बिरयानीम-स्वाद-लुप्तम’ दोष कहते हैं। इसका इलाज नहीं, उपाय किया जाता है। इसमें हम जैसे डाॅक्टर कुछ नहीं कर सकते, कोई पहुँचे हुए बाबा या सिद्ध पुरुष ही इसका उपाय निकाल सकते हैं।”

यह सुनकर राहुल जाने के लिये उठने लगा तो डाॅक्टर साब ने उससे कहा, “अरे बैठो बैठो!” फिर डाॅक्टर साब ने अपने मेज की दराज से एक चोगा और कुछ मालाएँ निकालीं और उन्हें धारण करते हुए बोले, “ये डाॅक्टरी-वॉक्टरी तो मैं घर चलाने के लिये करता हूँ, वैसे मेरा रियल पैशन तो ज्योतिष और साधना ही है।” फ़िर डाॅक्टर साब ने नकली दाढ़ी-मूँछ और माथे पे टीका-शीका लगाते हुए अपनी बात पूरी की, “दिन भर मैं डाॅक्टर मिथिलेश बनकर रहता हूँ और रात को बाबा मिथ्यानंद!”

फ़िर ‘डाॅक्टर बाबा’ ने राहुल का दायाँ हाथ अपने हाथों में लिया और ध्यान-मग्न होते हुए बुदबुदाये,”‘हैदराबाद जाकर 11 ब्राहमणों को पैराडाइज़ की चिकन बिरयानी का भोग लगाना पड़ेगा तभी तुम्हारी कुंडली का ये दोष दूर होगा।” जाते-जाते डाॅक्टर बाबा ने राहुल से फ़ीस की जगह दक्षिणा ली और तब छोड़ा।



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