Sunday, 18th November, 2018

चलते चलते

कोर्ट में मॉब लिंचिंग के खिलाफ याचिका लगाने वाला कोईं इंसान नही, एक बस थी!

24, Aug 2018 By Fake Bank Officer

अलवर. सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने फ़ेकिंग न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया है कि मोब-लिंचिंग के विरोध में कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाला कोई इंसान नही बल्कि एक ‘बस’ थी। बेचारी असहाय बस ने यह दावा किया था कि वह उस ज़माने से मोब-लिंचिंग का शिकार हो रही है जब लोग मोब-लिंचिंग का मतलब भी नही जानते थे। उधर, कोर्ट ने बस की अपील को सुनवाई के लिए स्वीकार भी कर लिया है।

इसी बस ने लगाईं है याचिका
इसी बस ने लगाईं है याचिका

वकील साहब ने बताया कि यह बस बहुत जर्जर अवस्था मे कोर्ट पहुची थी, चेहरे से तो सरकारी बस टाइप लग रही थी। उनके शीशे चटक चुके थे और पूरा शरीर चरमरा रहा था। वह इतनी घायल थी कि उसके मुंह से हॉर्न की आवाज़ भी नही निकल रही थी। ऐसा लग रहा था कि अब गिरी तब गिरी!

पार्किंग में खड़े अन्य वाहन उसे देख कर घबरा गए कि कहीं यह हमारे ऊपर ही न गिर जाए। कुछ वाहनों ने उससे सहानुभूति भी दिखाई और बस को टिकने के लिए एक दीवार से सटी जगह दे दी। जैसे-तैसे एक भले वकील ने उसका PIL वाला फॉर्म भरा और फीस के तौर पर उसके स्टेपनी बेच डाले। कोर्ट में उसने अपनी पैरवी खुद ही की थी क्योंकि वकील को देने के लिए उसके पास और कुछ बचा नहीं था। उसने अपनी बाद दमदारी से रक्खी।

बाद में हमारे संवाददाता ने आखिर उस बस को ढूंढ ही निकाला। मनोरमा टायरवाला (बदला हुआ नाम) ने हमें बताया कि ‘बात दो महीने पहले की है, एक बेकाबू भीड़ ने मुझ पर हमला कर दिया, ये कहकर कि मैंने एक गाय को टक्कर मारी है! लोगों ने तोड़फोड़ करके मेरे पुर्जों पर आग लगा दी थी! जबकि सच तो यह है कि मैं उस दिन चुपचाप अपने रास्ते जा रही थी, पर वो गाय ही अचानक मेरे सामने आ गयी थी!”

“मुझे अपनी सफाई देने का मौका तक नहीं दिया! इससे पहले भी मैं आरक्षण मांगने वालों की भीड़ में फँस चुकी हूँ! बरसों से हमारी बहनों के साथ कभी आरक्षण तो कभी ‘भारत बंद’ के नाम पर अत्याचार होते रहे हैं, मैं चाहती हूँ कि सरकार मोब-लिंचिंग के खिलाफ कड़ा कानून बनाकर बस-समाज को इंसाफ दिलाये!” -कहते हुए मनोरमा का गला भर आया।



ऐसी अन्य ख़बरें