Wednesday, 26th June, 2019

चलते चलते

खिलाने से ज़्यादा चेहरे पर लगाए जाने की वजह से विक्रेताओं ने 'मुल्तानी मिट्टी' फ्लेवर का केक बेचना शुरू किया

12, Jun 2019 By Rupesh Yadav

नयी दिल्ली. बर्थडे हो, वर्षगाँठ हो, गृह प्रवेश हो या फिर बच्चे का मुंडन ही क्यों ना हो, केक ने हमारी संस्कृति में आज एक ख़ास जगह बना ली है। ख़ुशी का कोई भी मौका ‘केक’ के बिना पूरा हो ही नहीं सकता। स्कूल और कॉलेज जाने वाले नवयुवकों के जीवन में भी इसका विशेष स्थान होता है।

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केक लगाने के बाद धोनी

परंतु शर्म की बात ये है कि अब ये प्रथा बिल्कुल बदलती जा रही है, अब वो बात नहीं रही जो हमारे पुरखों के वक़्त हुआ करती थी।

जी हाँ, पहले ‘केक’ केवल खाने के लिए मंगवाया जाता था और सब मिल बाँट कर खाते भी थे पर आजकल केक खाया कम जाता है, चेहरे पर लगाया ज्यादा जाता है।

मार्केट में आये इस बदलाव को टैप करने के लिए शहर के सभी केक विक्रेताओं ने कल एक जरूरी मीटिंग की। प्रतिदिन पचास किलो केक बेचने वाले सेठ तिलोकचंद जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि, “ब्लैक फारेस्ट, रेड वेलवेट और पाइन एप्पल जैसे नामी-गिरामी फ्लेवर अचानक बिकना कम हो गए हैं, आजकल ग्राहक skin-care फ्लेवर की डिमांड करने लगे हैं! क्या किया जाए?”

सेठ जी के वक्तव्य पर दो घंटे तक गहन चर्चा की गई और निष्कर्ष निकाला गया कि अब ‘मुल्तानी मिट्टी’ फ्लेवर का केक बेचना ही ठीक रहेगा। इससे ग्राहकों की प्राकृतिक सुंदरता बनी रहेगी, चेहरे से दाग-धब्बे भी हट जाएंगे और केक ज़बरदस्ती लगाने पर कोई गुस्सा भी नहीं करेगा।

वैसे, जब हमने तिलोकचंद जी से पूछा कि ये नया फ्लेवर वाला केक खाते बन जाएगा या नहीं? तो उन्होंने झिड़कते हुए जवाब दिया कि, “आजकल केक खाता कौन है? चलो हटो यहाँ से!”

उधर, मुल्तानी मिट्टी फ्लेवर वाली केक आने से युवतियाँ सबसे ज्यादा खुश हैं। प्रिया नाम की एक युवती ने कहा कि, “यार, मेरा चेहरा रूखा-रूखा सा नज़र आ रहा है, पार्लर जाने के बारे में सोच रही थी लेकिन प्लान कैंसल कर दिया! परसों सोनल का बड्डे है, वहीँ पर केक लगा लूँगी! सब ठीक हो जाएगा!” -कहते हुए प्रिया का चेहरा मुल्तानी मिट्टी के बिना ही खिल उठा।



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