Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

व्हॉट्सएप पर किसी मैसेज को 5 से ज़्यादा लोगों को नहीं कर सकते फ़ॉरवर्ड; बूढ़े हुए निराश

25, Jul 2018 By Guest Patrakar

एजेंसी. फ़ेक न्यूज़ और अफ़वाहों को रोकने के लिए भारत सरकार की रिक्वेस्ट पर व्हॉट्सएप ने फ़ेक न्यूज़ पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसके लिए उसने अफ़वाहों के सबसे बड़े स्रोत यानि ‘फ़ॉरवर्ड्स’ की संख्या को सीमित कर दिया है। जी हाँ! अब आप किसी भी मैसेज को 5 लोगों से ज़्यादा को फ़ॉरवर्ड नहीं कर पाएँगे।

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मैसेज फ़ॉरवर्ड ना कर पाने से दुखी तीन बुड्ढे

इस ख़बर को सुनकर कई लोग बहुत दुःखी हैं। जिनमें सबसे ऊपर वो बुज़ुर्ग वर्ग है, जिनकी ज़िंदगी रिटायरमेंट के बाद व्हॉटसएप के सहारे ही चल रही थी। ऐसे ही एक बुज़ुर्ग से हमने भी बात की। नंदकिशोर मिश्रा नाम के ये सज्जन वैसे तो बैंक के आला अफ़सर थे लेकिन अपनी रिटायरमेंट के बाद उनकी ज़िंदगी का एक मात्र सहारा व्हॉटसएप ही था।

नंदकिशोर जी ने हमें बताया, “मैं बैंक की नौकरी में अक्सर व्यस्त रहता था। ऐसे में कब बच्चे बड़े हो गए पता ही नहीं चला और इसलिए उनसे ज़्यादा बात भी नहीं हो पायी। रिटायरमेंट के बाद उनसे बात करना बड़ा अजीब सा लगता था। मुझे वैसे भी हमेशा व्यस्त रहने की आदत थी, जबकि रिटायरमेंट के बाद मैं बिल्कुल ख़ाली हो गया। लेकिन तब मेरी बहू ने मुझे स्मार्टफ़ोन लाकर दिया और मैं व्हॉटसएप की दुनिया में चला गया।”

“फिर तो मैं सुबह-शाम, यहाँ तक कि रात को भी अपने जानने वालों को मैसेज भेजता रहता था। लेकिन व्हॉट्सएप वालों के इस नए फ़ैसले की वजह से अब मैं फिर से अकेला हो जाऊँगा। मेरे हिसाब से उन्हें ये फ़ैसला वापस ले लेना चाहिए या कम से कम हम बूढ़े लोगों को थोड़ी छूट दे देनी चाहिए।”

इनके अलावा, कई और लोग भी थे जो इस नए अपडेट को लेकर काफ़ी मायूस थे। इनमे से एक वर्ग था घर पर रहने वाली बहुओं का! ऐसी ही एक बहू हेमा अरोड़ा से भी हमने बात की। उनका कहना था, “पहले माँ जी पूरे दिन व्हॉटसएप पर लगी रहती थीं तो किट-किट नहीं करती थीं। लेकिन अब इस पाबंदी के कारण वो वापस हर चीज़ में टाँग अड़ाना शुरू कर देंगी। हमारा तो जीना मुश्किल कर दिया इन व्हॉट्सएप वालों ने!”

व्हॉट्सएप से लगे इस झटके के लोग अब फ़ेसबुक पर घात ज़माने की सोच रहे हैं लेकिन एक प्रॉब्लम है! फ़ेसबुक पर व्हॉट्सएप की तरह एक साथ दस-दस लोगों को फ़ॉरवर्ड नहीं भेज सकते, इसलिए उसे इस्तेमाल करने का कोई मतलब नहीं रह जाता। बहरहाल, अब बुज़ुर्गों को वापस मोहल्ले की चौपाल पर कुर्सी जमाकर आते-जाते लोगों पर कमेंट पास करके ही अपना समय गुज़ारना पड़ेगा।



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