Tuesday, 18th September, 2018

चलते चलते

मुंबई लोकल में दूसरे पैसेंजर्स के बैग रखते-रखते युवक के मसल्स बने

05, Jul 2018 By बगुला भगत

मुंबई. कभी-कभी अभिशाप भी इंसान के लिए वरदान बन जाता है। मुंबई लोकल के पैसेंजर जयेश जाधव के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। लोकल ट्रेन में दूसरे पैसेंजर्स के बैग रखते-रखते जयेश के मसल्स बन गये हैं, जिसकी वजह से उसकी पर्सनलिटी में निखार आ गया है और उसका जिम ज्वॉइन करने का खर्चा भी बच गया है।

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लोकल ट्रेन में सेल्फ़ी लेकर ख़ुशी मनाता जयेश

रोज़ बोरीवली से दादर तक सफ़र करने वाले जयेश ने फ़ेकिंग न्यूज़ के साथ अपनी काया के इस ‘कायाकल्प’ का पूरा अनुभव शेयर किया। हमारे मरियल रिपोर्टर को अपने डौले दिखाते हुए उसने कहा, “पहले ये इससे आधे भी नहीं थे भाईसाब! सब लोकल का कमाल है!”

उसने आगे कहा, “एक्चुअली, चार साल में मुझे आज तक कभी सीट नहीं मिली, पूरे साल मैं खड़ा ही रहता है। जैसे लोग अपनी सीट फ़िक्स कर लेते हैं, वैसे ही मैंने अपने खड़े होने की जगह फ़िक्स कर रखी है। मैं बैठे हुए पैसेंजर्स की टाँगों के बीच में खड़ा होता हूँ, जहाँ ऊपर रैक पर बैग रखे होते हैं।”

“तो हर कोई मुझे बैग पकड़ा के कह रहा होता है कि ‘प्लीज़ रख दीजिये!’ शुरु-शुरु में तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता था। मैं मन ही मन बड़बड़ाता था कि ‘नौकर लग रहा हूँ तुम्हारा’, लेकिन धीरे-धीरे मुझे इसमें मज़ा आने लगा, जब मैंने अपने बाइसेप्स में फ़र्क महसूस किया। मैंने सोचा- यार एक्सरसाइज़ की एक्सरसाइज़ और परोपकार का परोपकार!”

“अब तो मैं बैग रखने में इतना एक्सपर्ट हो गया हूँ कि अगर रैक ठसाठस भी भरी हो ना, तो दो-चार बैग तो फिर भी सेट कर ही देता हूँ। लोग अब मेरी जगह पे किसी को खड़ा नहीं होने देते, मेरे लिए उस जगह को घेर के रखते हैं।” -उसने गर्व से सीना फुलाते हुए कहा।

जयेश की बॉडी के इस रूपांतरण को देखकर अब दूसरे पैसेंजर्स में भी लोगों के बैग रखने की होड़ मच गयी है। कुछ पैसेंजर तो अपनी सीट छोड़कर खड़े होने को भी तैयार हैं (जो लोकल के इतिहास में कभी नहीं हुआ) लेकिन जयेश अपनी स्टैंडिंग वाली जगह छोड़ने को तैयार नहीं है।



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