Thursday, 2nd April, 2020

चलते चलते

केजरीवाल जैसा धरना देने वाला कोई बंदा आजादी की लड़ाई में होता तो अंग्रेज़ 1920 में ही डरकर भाग जाते: एक्सपर्ट्स

16, Jun 2018 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. इतिहासकारों के एक समूह ने दावा किया है कि अगर आजादी की लड़ाई में ‘घनघोर’ धरना देने वाला कोई बंदा शामिल होता तो हमें बहुत पहले आजादी मिल गई होती, यानि की 1920 के आसपास! घनघोर धरना देने वाले से मतलब है, कोई दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल जैसा! हालाँकि, उस समय के लोग भी अनशन और उपवास वगैरह करते थे, लेकिन केजरीवाल जी होते तो अंग्रेजों का दिमाग खराब हो जाता और वो देश छोड़कर भाग जाते!

kejriwal
अपना फेवरेट काम करते हुए केजरीवाल जी!

इस थ्योरी पर यकीन करने वाले प्रोफ़ेसर नागपाश जी ने बताया कि “सोचिए! अगर वायसरॉय हाउस में कोई अपना बोरिया-बिस्तर लेकर धरने पर बैठ जाए, और वहाँ से हिलने का नाम ना ले, तो अंग्रेज़ कितनी देर तक टिक पाते! ऊपर से सोफे पर अवैध कब्ज़ा कर लेते सो अलग!”

“ऐसे-ऐसे तर्क देते कि अंग्रेजों की बोलती बंद हो जाती! हमारी तो किस्मत ही खराब थी कि ऐसा धरना देने वाला मुख्यमंत्री हमें आज जाकर मिला है! पूरे सत्ताईस साल का नुकसान हो गया हमें!” -उन्होंने कुछ किताबों पर सरसरी नज़र डालते हुए कहा।

गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री, अपने मंत्रियों को साथ लेकर फिर से LG के खिलाफ धरने पर बैठ गए हैं, उनकी इस धरना देने की कला से ही इतिहासकार प्रसन्न हुए हैं।

उधर, महात्मा गाँधी जी ने भी इस बात की पुष्टि की है। उन्होंने हमारे स्वर्ग बीट के रिपोर्टर को बताया कि “मैं तो जब कोई बड़ा कारण होता था, तभी अनशन पर बैठता था, लेकिन ये तो बिना वजह भी दस-बीस दिनों का धरना पेल देता है! मास्टर आदमी है ये! काश, ये हमारे साथ होता तो हम विक्टोरिया की ईंट से ईंट बजा देते!”

वहीँ, सोफे पर बैठकर संघर्ष को अंजाम दे रहे ‘आप’ पार्टी के एक बड़े नेता ने फ़ेकिंग न्यूज़ से कहा कि “हमें यहाँ बैठने का कोई शौक नहीं है! आप पाँच दिन सोफे पर बैठकर देखो, कमर टूट जाती है!” उधर, दिल्ली के उपराज्यपाल ने घोषणा की है कि जो भी यह पता लगाएगा कि आखिर केजरीवाल जी धरना क्यों दे रहे हैं, तो उन्हें दस लाख का इनाम दिया जाएगा!



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