Wednesday, 26th June, 2019

चलते चलते

समोसे में आलू देखकर भावुक हुए तेजस्वी, कहा- "लालू जी की याद आ गई!"

03, May 2019 By Ritesh Sinha

पटना. कुछ दिन पहले लालू यादव ने जेल से तेजस्वी यादव को एक चिट्ठी लिखी थी, चिट्ठी में उन्होंने लिखा था कि, “कोई मेरी तरफ भी तो ध्यान दो! कब तक यहाँ पड़ा रहूँगा!” इस एक लाइन की चिट्ठी का जवाब देते हुए तेजस्वी ने भी आधी लाइन की एक चिट्ठी लिखी, जिसमें लिखा था कि, “हम लोग अभी चुनाव में व्यस्त हैं!”

तेजस्वी यादव
समोसे वाले को प्रणाम करते तेजस्वी

इस घटना के एक सप्ताह बाद तेजस्वी यादव कल शाम को चुनाव प्रचार करने निकले हुए थे। जब उनके गुर्गों को भूख लगी तो वे नाश्ता करने सड़क किनारे एक टपरी पर रूक गए। सबके लिए समोसे का आर्डर कर दिया गया। जैसे ही दुकानदार ने समोसा डिलीवर किया, तेजस्वी यादव भावुक हो उठे। उनके आँखें डबडबा गई।

उन्हें इस हाल में देखकर एक छुटभैये नेता ने बड़ी हिम्मत करके उनसे पूछा, “क्या हुआ भैया! रो काहे रहे हो? प्याज-मिर्ची और चाहिए क्या?”

“नहीं-नहीं, सब ठीक है! हमें तो इस समोसे में ‘आलू’ देखकर लालू जी की याद आ गई थी! वो कहा करते थे कि ‘समोसे में जब तक आलू रहेगा, चुनाव में तब तक लालू रहेगा’ लेकिन इस बार के चुनाव में तो वो हैं ही नहीं! जबकि समोसे में ‘आलू’ अभी भी इन्टैक्ट है!” -कहते हुए वे फफक पड़े। पलक झपकते ही तीन-चार गमछों का जुगाड़ हो गया, जिससे तेजस्वी अपना मुँह पोछने लगे।

“इसकी दूकान में आग लगा दें भैया? साला समोसे में आलू मिलाके बेच रहा है? आपको भावुक कर दिया!” -एक छुटभैये नेता ने हीरो बनते हुए कहा। “अरे नहीं-नहीं, जाने दो! उसकी क्या गलती है!” -तेजस्वी ने इशारों में कहा।

थोड़ी देर बाद जैसे ही तेजस्वी यादव का मूड ठीक हुआ, उसने समोसे वाले से तीन बार चटनी और दो बार प्याज माँगकर, बड़े चाव से समोसे को उसके अंजाम तक पहुँचाया। “जल्दी ही कुछ करना पड़ेगा!” -गाडी में बैठते हुए तेजस्वी यादव ने कहा।



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