Tuesday, 22nd October, 2019

चलते चलते

स्टार प्रचारकों की लिस्ट से नाम गायब होने पर नवजोत सिंह सिद्धू ने लिख डाली दुःख भरी शायरी की किताब

08, Oct 2019 By किल बिल पांडे

अमृतसर.  किसी ज़माने के मशहूर कमेंटेटर और कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता नवजोत सिंह सिद्धू के सितारे इन दिनों गर्दिश में चल रहे हैं। पहले तो करतारपुर कॉरिडोर के बनने का कारण खुद को मानने के बावजूद उन्हें इसी कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में नहीं बुलाया गया, कैप्टन अमरिंदर से उनके मनमुटाव जगज़ाहिर होते रहे, और अब रही सही कसर उन्हें आगामी विधानसभा चुनाव के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से बाहर निकाल कर पूरी कर दी गयी।

navjot siddhu
किताब में से एक शायरी ठोंकते सिद्धू

ऐसे ग़मगीन माहौल में भी सकारात्मकता खोजते हुए नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी शायरी की किताब लाने का ऐलान कर दिया है।

अपने हँसमुख स्वभाव से विपरीत, इस किताब में उनकी दर्द भरी शायरियाँ पढने को मिलेगी। पार्टी आलाकमान के रुख से नाराज़ सिद्दू ने अपनी बात रखने के लिए अमृतसर में प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की थी, जिसमे उन्होंने ये घोषणा कर सबको चौंका दिया।

अपनी दर्द भरी शायरी लिखने का कारण बताते हुए सिद्धू ने बताया कि, “ओये गुरु! आदमी का मूड जैसा होता है, वो वैसी ही शायरी लिखता है! जब से कांग्रेस ज्वाइन की है, हँसना छोड़िये मुस्कुराना तक भूल गया हूँ, मैंने तो मजाक में कहा था कि राहुल गाँधी के अमेठी से चुनाव हरने पर राजनीती छोड़ दूँगा लेकिन इन लोगों ने तो सीरियस ही ले लिया! कॉमेडी शो के जज की बात को भी कोई इतना सीरियस लेता है भला?“ -आँसूओं से भरी आँखे लेकर सिद्धू ने कहा।

सिद्धू ने आगे जानकारी दी कि, “फिलहाल इस किताब को लिखने के अंतिम चरण में हूँ और जैसे हालत चल रहे हैं लगता है इस हफ्ते किताब पूरी भी हो जाएगी! सोचा था कि इस बार जब प्रचार करने जाऊँगा तो जनता को सुनाऊंगा लेकिन ये हो नहीं पायेगा!”

“इस किताब को लिखने में संजय निरुपम का भी बड़ा हाथ रहा है। हम लोग रोज़ शाम को अपने एक दूसरे का सुख-दुःख बाँटते हैं! अब वो मेरी किताब लॉन्च करेंगे, मैं उनकी!” -सिद्धू ने टेबल ठोकते हुए कहा।

सिद्धू यहीं नहीं रुके, माहौल को गंभीर होता देख, बिना किसी के कहने पर अपनी डायरी निकाल कर उससे पढ़ते हुए कहने लगे कि,“ हमने जिसे अपना समझा उसने कर दिया पराया, बड़ा बेगैरत था मैं जो इसमें आया!

अचानक शायरी की ऐसी सुनामी आते देख सारे पत्रकारों में हाहाकार मच गया, और इससे पहले कि सिद्धू शेरों की और बरसात करते, सारे रिपोर्टर इस आपदा से बचते हुए फ़ौरन नौ दो ग्यारह हो लिए।



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