Thursday, 27th June, 2019

चलते चलते

पतंजलि प्रकाशन लाएगा 'बाल नरेंद्र' का सीक्वल- 'किशोर नरेंद्र'

28, Dec 2018 By gotiya

हरिद्वार. ‘परिधान’ लांच करके तहलका मचाने के बाद अब बाबा रामदेव पुस्तकों की दुनिया में आने वाले हैं लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी के तहत वोटरों को रिझाने के लिए BJP ने पतंजलि प्रकाशन के साथ मिलकर सुप्रसिद्ध ‘बाल नरेंद्र’ का सीक्वल निकालने का एलान किया है। पुस्तक का नाम ‘किशोर नरेंद्र’ होगा। इसमें नरेन्द्र मोदी के घर छोड़कर संघ के कार्यकर्ता के रूप में शुरूआती दिन से लेकर उनके दिल्ली विश्वविद्यालय में डिस्टेंस लर्निंग से उच्च शिक्षा पूरी करने तक की प्रेरक कहानियाँ होंगी।

baal-narendra
अब युवाओं की बारी है!

अमित शाह ने मीडिया को बताया “बाल नरेंद्र को सभी उम्र के लोगों ने पढ़ा और बेस्टसेलर बनाया। हमारे पास स्कूल के कई शिक्षकों के फोन और पत्र आए जिसमें उन्होंने अपने स्कूल के बच्चों पर बाल नरेंद्र के चमत्कारी प्रभाव के बारे में बताया। लद्दाख के एक स्कूल के शिक्षक ने मुझे लिखा कि उनके स्कूल के बच्चे रांचो की नक़ल करके खुराफात करने में लगे रहते थे और उल्टे-सीधे सवाल पूछते थे लेकिन बाल नरेंद्र पढने के बाद वे आदर्श विद्यार्थी हो गए हैं! एक बच्चा तो बाल नरेंद्र से इतना प्रेरित हुआ कि मुझसे पूछने आया कि मगरमच्छ का बच्चा कहाँ मिलेगा! लद्दाख में मगरमच्छ नहीं होते हैं इसलिए वह याक का बच्चा पकड़कर घर ले आया था!”

मंच पर शाह के साथ मौजूद बाबा रामदेव ने कहा “2019 अब तक का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव होगा, पिछली बार ‘बाल नरेंद्र’ पढ़कर देश के जागरुक युवाओं ने मोदी जी को वोट दिया था, इस बार खासतौर पर युवाओं को ध्यान में रखकर पतंजलि प्रकाशन अपनी पहली पुस्तक ‘किशोर नरेंद्र’ छापेगा! उम्मीद है कि न सिर्फ युवा, बल्कि युवाओं को कॉलेज में पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर भी इसे पढेंगे! हमें राकेश सिन्हा जी ने आश्वासन दिया है कि वे 100 प्रतियाँ खरीदेंगे और अपने छात्रों से इस पुस्तक पर रिपोर्ट बनाने के लिए भी कहेंगे!”

ऐसा माना जा रहा है कि इस पुस्तक के जरिए BJP एक तीर से दो शिकार करने वाली है। जहाँ एक ओर यह पुस्तक देश के जागरुक वोटरों को रिझाएगी, वहीँ नरेंद्र मोदी की डिग्री पर सवाल उठाने वालों को जवाब भी मिल जाएगा। पुस्तक में ना सिर्फ नरेंद्र मोदी की डिग्री की स्कैन्ड मार्कशीट होगी बल्कि उनकी पढ़ाई के दौरान बनाए गए नोट्स भी होंगे।

गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी ने 17 साल की उम्र में ही देश की सेवा के लिए अपना घर छोड़ दिया था और संघ के कार्यकर्ता बन गए थे. संघ के एक सीनियर ने उन्हें पढ़ाई जारी रखने की सलाह देकर कॉलेज में एडमिशन कराया. उस दौर के संघर्ष और सादगी को वे आज भी नहीं भूले हैं। अपने 15 लाख के सोने से नाम लिखे सूट को वे आज भी बाल नरेंद्र की तरह रात में तकिये के नीचे रखकर इस्त्री करते हैं और सफ़ेद जूतों पर चॉक घिसकर चमकाते हैं।

उम्मीद है कि ‘किशोर नरेंद्र’ भी बेस्टसेलर साबित होगी और युवाओं को सफलता हासिल करने की नई टिप्स देगी।



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