Saturday, 23rd March, 2019

चलते चलते

"जो मंत्री नहीं बन सके, उन्हें पैसे कमाने के और मौके दिए जाएंगे!" -कमलनाथ ने दिया आश्वासन

27, Dec 2018 By Fake Bank Officer

भोपाल. मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के सामने कर्ज माफी से भी बड़ी चुनौती मंत्रालयों का बंटवारा करना साबित हो गया है। कांग्रेस के विधायकों के साथ-साथ उनको बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों को भी खुश करना पड़ रहा है। ऐसे में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ-साथ सबकी कमाई का भी ध्यान रखना पड़ रहा है।

सबके साथ न्याय होगा
सबके साथ न्याय होगा

“ऐसा है कि 15 सालों के बाद सत्ता का वनवास खत्म हुआ है और ऐसे में हर विधायक ज्यादा से ज्यादा कमाई करना चाहता है! कई विधायकों ने चुनाव प्रचार के दौरान अपनी पूरी जमा पूंजी मतदाताओं को देसी शराब पिलाने में उड़ा दी!”

अब जाहिर है कि जन्हें उनका हिस्सा ब्याज सहित वापस मिलना चाहिए और फिर ऊपर से ये ‘निर्दलीय’ बिन बुलाए समर्थन देने चले आये। अब उनका भी तो ध्यान रखना ज़रूरी है ना!” -गुटका थूकते हुए एक कांग्रेसी विधायक ने फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया।

वहीँ, बसपा के विधायक संजीव सिंह ने भी हमारे रिपोर्टर को बताया कि “देखिए, हम इन छोटे दलों के टिकट पर चुनाव लड़ते ही इसलिए हैं कि बाद में सही कीमत मिलने पर पाला बदल सकें! बहनजी ने हमें हमे सख्त निर्देश दे रखे हैं कि जब तक सम्मानजनक लड्डू ना मिले तब तक विचारधारा से समझौता नही करना है! हम तो कमलनाथ जी से यही विनती करेंगे कि वो हर तीन महीने में अपना मंत्रीमंडल बदलें ताकि सभी 121 विधायक मंत्री बन कर जनता की और स्वयं की सेवा कर सकें!”

वहीँ, मुख्यमंत्री जी ने इस समस्या का हल निकालते हुए यह फैसला किया है कि जो भी विधायक मंत्री नही बन पाए हैं उन्हें उनकी ‘अयोग्यता’ के हिसाब से मंडल अध्यक्ष या निगमों का सचिव आदि पद प्रदान किया जाएगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मंत्री ना होने के कारण उनके साथ कोई अन्याय ना हो! इस स्कीम में बसपा, सपा और निर्दलीय विधायकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा।



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