चलते चलते

पता नहीं 'दंगों' का नाम सुनते ही हमारे नेता सामने कैसे आ जाते हैं: अरविंद केजरीवाल

28, Feb 2020 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. पिछले चार दिनों से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, अपना सर खुजा-खुजाकर ये सोच रहे हैं कि दंगों में उनकी ही पार्टी के नेता का नाम सामने कैसे आ जाता है? क्या पार्टी को किसी की नजर लग गई है या पार्टी में कुछ ज्यादा ही ईमानदार लोग आ गए हैं?

Kejriwal-Hug-Day
मायूस केजरीवाल

यही वजह है कि मुख्यमंत्री जी ने एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन कर दिया है जो इस बात का पता लगाएगी कि हमारे नेता, धमाल फिल्म के जावेद जाफरी की तरह इस मसलों में सामने कैसे आ जाते हैं?

फ़ेकिंग न्यूज से बात करते हुए केजरीवाल ने बताया कि, “देखिए! हम अपनी पार्टी में किसी को शामिल करने से पहले उसकी गहराई से जाँच करते हैं, एक बार नहीं, दस बार उसे मेरी खतरनाक निगाहों के सामने से गुजरना पड़ता है, मैं चेहरा देखकर जान जाता हूँ कि कौन आदमी कैसा है?

जब पूरी तरह यकीन हो जाता है कि ये बंदा/बंदी ईमानदार है तभी हम उसे पार्टी में कोई पद देते हैं! लेकिन पिछले कुछ दिनों से सारा मामला ही गड़बड़ा गया है, हमारे नेता छत में पापड़ सुखाने की बजाय पेट्रोल बम और पत्थर सुखा रहे हैं! छत का यूँ गलत इस्तेमाल हमारी पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी!”

पहले आगजनी में, भड़काऊ भाषण देने में, उसके बाद फायरिंग में और अब दंगों में, ये हमारी ही पार्टी के नेता सबसे आगे कैसे हो जाते हैं, ये अमित शाह की कोई नयी चाल है क्या? मुझे तो लगता है पेट्रोल बम बनाना उसी ने सिखाया होगा वरना हमारे नेता ऐसे नहीं थे!

इन लोगों के चक्कर में बेचारा कन्हैया कुमार फँस गया, मजबूरी में मुझे उस पर केस चलाने का आर्डर देना पड़ा!” -कहते हुए केजरीवाल जी मायूस हो उठे।

हालाँकि मैंने ‘दोगुनी सजा दो!’ वाला डायलॉग मीडिया में चेप दिया है लेकिन मुझे लगता है कि इस बार इससे काम नहीं चलेगा क्योंकि ये डायलॉग तो मैं 2012 से बोल रहा हूँ! इससे भी बड़े दुःख की बात ये है कि मेरी जीत पर जो लोग खुश हो रहे थे वही मुझे अब गरिया रहे हैं!” -कहते हुए वे राजघाट के लिए रवाना हो गए।



ऐसी अन्य ख़बरें