Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

गंभीर परिस्थितियों में 'ना' हँसने की कला सीखेंगे राहुल गाँधी, जर्मनी की एक PR कंपनी को मिला कॉन्ट्रैक्ट

20, Aug 2018 By Guest Patrakar

नयी दिल्ली. राहुल गाँधी का गंभीर मौक़ों पर हँस देना काँग्रेस पार्टी को भारी पड़ रहा है। चाहे जयललिता की अंतिम यात्रा हो या कैप्टन अमरिंदर सिंह की माताजी के देहांत का मामला, राहुल दुःख के घड़ी में भी हँसते हुए देखे जा सकते हैं। अभी हाल ही में जब देश के पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी को सारा देश अंतिम विदायी दे रहा था, तब भी काँग्रेस अध्यक्ष कैमरे पर मुस्कुराते हुए नज़र आ ही गए। बाद में इस हरकत पर उनकी और कांग्रेस की काफी निंदा भी हुई।

Rahul Gandhi 12
दुःख होने वाली जगह में हँसते राहुल जी

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए सोनिया गाँधी ने राहुल बाबा के लिए जर्मनी की एक PR कंपनी को किराये पर रख लिया है, जो ना सिर्फ राहुल को ऐसे मौक़ों पर हँसने से रोकेंगे बल्कि उन्हें दुःख जताना भी सिखाएँगे।

इस बारे में और जानकारी देते हुए कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने बताया कि “राहुल को बचपन से ही सुख-सुविधा वाले माहौल में रखा गया है! यही वजह है कि उन्हें अंदाजा ही नहीं है कि किस मौके पर कैसा बर्ताव करना चाहिए। बार-बार किसी शोकसभा में इस तरह हँसना हम पर भारी पड़ रहा था, बस इसीलिए हमने जर्मनी की इस कंपनी को हायर कर लिया, जो राहुल जी को यह बताएँगे कि दुःख की घड़ी में कैसे रिएक्शन देना चाहिए!”

“हमने उन्हें 2 मिलीयन डॉलर/साल की दर पर हायर किया है। आशा है कि इसके बाद आदरणीय राहुल जी गंभीर मौक़ों पर गंभीर और ख़ुशी के मौक़ों पर हँसंते-खेलते नज़र आएँगे!” -आजाद साब ने बड़ी आजादी से कहा।

हमने उस कंपनी यानि की ‘नैचुरल बायोडिटेक्ट’ (NBD) के CEO श्री गजोधर ऐम्बरवूश से भी बात की। उन्होंने हमें बताया कि “देखिए! बचपन से सुख देख रहे बच्चों में इस तरह की ख़ामियाँ नज़र आ ही जाती हैं! ऐसे में उन्हें पता ही नहीं होता कि किसी के दुःख में हमें दुखी होना होता है। ऐसा ही एक केस हमारे एक क्लायंट काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी का भी है!”

“जो कॉन्ट्रैक्ट हमने साइन किया है उसमे लिखा है कि हम राहुल को किसी भी शोकसभा में भेजने से पहले ठीक से ट्रेनिंग देंगे और इमरजेंसी के मौकों पर उनके लिए ग्लिसरीन की एक बोतल तैयार, ताकि जब ज़रूरत पड़े तो वे ग्लिसरीन छिड़ककर आँसू बहा सकें! कास्ट-कटिंग के लिए हम प्याज का उपयोग भी कर सकते हैं!”

“बस, यह बेसिक ट्रेनिंग पूरी हो जाए तो राहुल बाबा भी नार्मल व्यवहार करना सीख जाएँगे” -गजोधर ने गुटखा चबाते हुए कहा।

राहुल की ट्रेनिंग अगले हफ़्ते से शुरू होगी और लगभग एक साल तक चलेगी! लेकिन ऐसे किस्से हमें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि जो इंसान मौक़ों के हिसाब से हँसना-रोना नहीं जानता उसे दुनिया की सबसे पुरानी पार्टी ने अपना अध्यक्ष कैसे मान लिया है?



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