Wednesday, 21st November, 2018

चलते चलते

"चिराग पहले चुनाव लड़ेगा फिर शादी करेगा!" रामविलास ने कहा, घरवाले बहू के लिए रिज़र्व सीट खोजने निकले

30, Jul 2018 By ashesharun

पटना. मौसम वैज्ञानिक उर्फ ‘लोजपा’ सुप्रीमो रामविलास पासवान इन दिनों बहुत परेशान हैं। चूँकि बहन मायावती, जे है से, पीएम बनने वाली लाइन में लग गई हैं, तो हेडेक तो बढ़नी ही थी। भतीजा तेजस्वी भी बागी तेवर दिखाते हुए मायावती का साथ दे रहा है। तेजस्वी के पापा ‘लालू प्रसाद’ कभी पीएम मेकर हुआ करते थे। देवेगौडा और गुजराल साहब उनकी मदद से ही पीएम बने थे। कहीं भतीजा इस बार पीएम मेकर के रोल में आ गया तो सब गुड़-गोबर हो जाएगा।

Ram Vilas Paswan and Chirag
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सो, इन्हीं मुद्दों पर राय-मशविरा करने के लिए ‘लोजपा पार्टी’ की हाई लेवल बैठक बुलाई गई। चूँकि पार्टी पारिवारिक है, सो सभी फेमिली मेम्बर हाजिर हो गए। मौसम वैज्ञानिक ने राय शुमारी का एलान किया। सीनियरिटी के लिहाज से मँझले भाई की बारी पहले आई। मंझले ने कहा- “भैया, सबसे बड़ी समस्या चिराग की शादी की है, लड़का पैंतीस साल का हो गया है! शादी हो गई रहती तो अब तक घर में एक या दो कैंडीडेट आ गए होते! पार्टी का नुकसान हो रहा है!”

बातचीत ‘शादी’ की हो रही थी, सो चिराग मोबाइल पर ‘हैलो-हैलो’ बोलकर बैठक से बाहर निकल गए। छोटे ने कहा कि कुछ भी हो, है तो बच्चा ही। अपनी शादी की बात सुनकर लजा रहा है। पूरी पार्टी, मतलब पूरी फैमिली की राय जानने के बाद सुप्रीमो ने ऐलान किया- “ठीक है!”

“आप लोग पहिले एगो कांस्टीच्यूएंसी चुनिए। हम फौरन से पेश्तर शादी की तारीख का एलान कर देंगे।” यह सुनते ही मँझले की चीख निकल गई- “..तो क्या चिराग की शादी फौरेन में करेंगे!” पासवान जी हँस पड़े- “फौरन से पेश्तर का मतलब होता है जल्द से जल्द!” इतना कहकर उन्होंने छोटे की ओर देखा।

भाइयों ने समझ लिया कि ‘चिरागवा’ की शादी में असली बाधा है- ‘एक अदद कांस्टीच्यूएंसी’ की। बहू आएगी तो पारिवारिक परंपरा के हिसाब से चुनाव भी लड़ेगी। अब तक यही हुआ है। परिवार के सभी बालिग सदस्य चुनाव जरूर लड़ते हैं। मंझले ने शंका जाहिर की- “राज्य में कुल जमा छह रिजर्व सीट हैं, तीन पर फैमिली मेम्बर का कब्जा है! झारखंड की तरफ नज़र घुमाएँ क्या?”

इस बीच छोटे को खुजली का अहसास हुआ। दबी जुबान से उनकी राय आई- “भैया, एक काहे, दो सीट खोज लेते हैं! अपना प्रिंस राज भी बालिग है! पिछले इलेक्शन में एसेम्बली लड़ा था, पब्लिक दगा दे गई! पार्लियामेंट लड़ेगा तो ठीक रहेगा!” -इसी तर्क के साथ बैठक बर्खास्त हुई।

तय पाया गया कि सब काम छोड़कर एक ‘कांस्टीच्यूएंसी’ की खोज की जाए। छोटे को इस प्लान में दिलचस्पी है। एक के बदले दो खोज लेंगे। डर भी है। कहीं खोज पूरी नहीं हुई तो दुल्हन को मुंह दिखाई में अपनी वाली सीट न देनी पड़ जाये! सुप्रीमो ने भाइयों को यह रियायत दी है कि सीट की खोज झारखंड में भी की जा सकती है। बंट गया तो क्या हुआ, है तो अपना भाई ही ना! हां, यूपी की तरफ नहीं देखना है।



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