Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

राफ़ेल डील को 'रोफ़ल डील' बोलते पाया गया एक डिफ़ेन्स एक्सपर्ट

17, Feb 2018 By Guest Patrakar

एजेंसी. कुछ दिनों से देश में एक हंगामा बहुत ज़ोर-शोर से चल रहा है। हम प्रिया वारियर की बात नहीं कर रहे, हम बात कर रहे हैं राफ़ेल डील की! राफ़ेल डील के नाम पर रोज़ संसद में बहस हो रही है। जहाँ विपक्ष सरकार को इस डील की सारी जानकारी देने को कह रही है, वहीं सरकार कह रही है कि हमारा फ्रांस के साथ ‘सीक्रेट एग्रीमेंट’ है, इसलिए हम इसे नहीं बता सकते। उधर, न्यूज़ चैनलों पर भी राफ़ेल डील पर जमकर डिबेट होती दिख रही है।

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एक न्यूज़ चैनल पर चल रही डिबेट

लेकिन कल राफ़ेल डील की चर्चा पर कुछ ऐसा हो गया, जिसे सुनकर पूरा देश हँसते-हँसते लोट पोट हो गया। ज्ञानदत्त गांगुली ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ज़ुबान फिसलने की वजह से उन्हें मुँह की खानी पड़ेगी। हुआ यूँ कि NDTV की एक डिबेट में उन्होंने राफ़ेल डील को ‘रोफल डील’ बोल दिया और ऐसा उन्होंने एक बार नहीं लगभग पचास बार किया, जिसकी वजह से वो ट्विटर पर ट्रेंड कर गये। ज्ञात हो रोफ़ल (ROFL) का मतलब होता है हँस-हँस के लोट-पोट हो जाना!

हमने इस बारे में ज्ञानदत्त जी से बात की और उनसे इस हादसे की पूरी जानकारी ली। ज्ञानदत्त जी ने कहा, “मैं पिछले कई सालों से डिफ़ेन्स एक्स्पर्ट हूँ और पहले भी ऐसी डील्स पर कई सवाल खड़े कर चुका हूँ। लोगों की आदत है छोटी सी बात का बवाल बनाने का। मैं बंगाली हूँ और मेरी आदत है कि हर बंगाली की तरह मैं भी ‘आ’ को ‘औ’ बोलता हूँ। इसीलिए मैंने ‘राफ़ेल’ को ‘रोफल’ डील बोल दिया, जिस पर लोगों ने मेरा जमकर मज़ाक़ उड़ाया।”

इस पर हमने समीर बावना जी से भी बात की, जो कि ख़ुद एक डिफ़ेन्स एक्स्पर्ट हैं और उस समय पैनल में मौजूद थे। बावना जी ने कहा, “ज्ञानदत्त जी अपनी बंगाली होने का फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं जबकि असलियत यह है कि उन्हें राफ़ेल डील को रोफ़ेल डील नहीं बोलते यह पता ही नहीं है। अगर इस बात में सच्चाई होती तो वो एंकर के टोकने के बाद भी राफ़ेल को रोफल ही बोल रहे होते। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस से पहले भी वो कई बार ओबामा को ओसामा बोल चुके हैं। मैंने पहली बार ऐसा व्यक्ति देखा है जो बोलने में भी ‘टाइपो’ करता है। उनको अपनी आदत सुधारनी चाहिए”

ज्ञानदत्त गांगुली फ़िलहाल गहरे सदमे में हैं। उनकी पत्नी का कहना है कि वो कुछ समय तक TV डिबेट्स से दूर ही रहेंगे। ख़ैर, राफ़ेल डील का मसला असलियत में भी रोफल डील बनता जा रहा है। हमारा मतलब है कि मज़ाक़ बनता जा रहा है। अब ऐसा कितने साल और चलेगा यह तो वक़्त ही बताएगा।



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