Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

"जेएनयू में एडमिशन नहीं मिला था, उसी की खुन्नस निकाल रहा है सूसूधीर", पुराने दोस्त का ख़ुलासा

06, Jan 2020 By बगुला भगत

नोएडा. जीजी न्यूज़ के धुआँधार एंकर सूसूधीर चौधरी और जेएनयू के बीच छत्तीस का आँकड़ा क्यूँ है, आज इस बात का ख़ुलासा हो ही गया! यह ख़ुलासा किया है सूसूधीर के साथ 30 साल पहले जेएनयू का एडमिशन फ़ॉर्म भरने वाले उनके एक पूर्व दोस्त ने!

Susudhir-and-JNU
लाल घेरे वाले नक़ाबपोश को ही सूसूधीर बता रहे हैं लोग

मुँह पर नक़ाब बाँधकर हमारे रिपोर्टर से मिले रोहित (काल्पनिक नाम) ने बताया कि “ये दुश्मनी आज की नहीं भाईसाब, तीस साल पुरानी दुश्मनी है, जब जेएनयू ने सूसूधीर को एडमिशन देने से मना कर दिया था।”

“एक्चुअली, एन्ट्रेन्स एग्ज़ाम में सूसूधीर के ज़ीरो नंबर आये थे, फिर भी वो ज़बरदस्ती इंटरव्यू रूम में घुस गया। यह देखकर टीचर हक्के-बक्के रह गये और उससे पूछा ‘तुम आख़िर यहीं पे एडमिशन क्यूँ लेना चाहते हो?’ तो सूसूधीर ने जवाब दिया ‘यहाँ लड़कियों से आसानी से फ्रेंडशिप हो जाती है, इसलिए मुझे भी इसी में एडमिशन लेणा सै!'”

“सॉरी, सिर्फ़ इस काम के लिए हम आपको एडमिशन नहीं दे सकते!’ टीचर्स ने कहा और उसे बाहर निकलवा दिया। निकलते-निकलते सूसूधीर ने ‘जीत’ के सनी देओल के ‘अगर तुम मेरी नहीं हुईं तो तुम्हें किसी की भी नहीं होने दूँगा’ वाले डायलॉग की तरह क़सम खाई कि ‘अगर मैं जेएनयू में नहीं पढ़ पाया तो किसी को भी नहीं पढ़ने दूँगा!'” –  रोहित ने 30 साल पुरानी घटना को याद करते हुए कहा।

“कहने वाले तो ये भी कह रहे हैं कि हमला करने वाले नक़ाबपोशों में सूसूधीर भी था। बट प्लीज़, आप मेरा नाम मत लेना!” – रोहित ने रिपोर्टर से प्रॉमिस कराया और चुपके से वहाँ से खिसक गया।



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