Saturday, 23rd March, 2019

चलते चलते

"हम फ़ैसला मंदिर बनने के बाद दें या पहले?" –सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से पूछा

02, Jan 2019 By बगुला भगत

नयी दिल्ली. ‘मंदिर तो वहीं बनेगा’, ‘मंदिर हम ही बनाएँगे’, ‘मंदिर है, मंदिर था और मंदिर ही रहेगा’, ‘मंदिर संविधान के तहत बनेगा’ -सरकार के मंत्रियों और बीजेपी के नेताओं के रोज़-रोज़ के इन बयानों से तंग आकर आख़िरकार सुप्रीम कोर्ट ने आज इस बारे में पूछ ही लिया!

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सरकार के जवाब का इंतज़ार करते जज साब

सुप्रीम कोर्ट के माननीय जजसाब ने आज सुबह अपने मुंशीजी के हाथ प्रधानमंत्री मोदी को चिट्ठी भिजवाई और पूछा कि “जब आपके लोग सब कुछ पहले तय कर ही चुके हैं तो फिर हमारा टाइम क्यों खोटी कर रहे हैं?”

“इस टेंशन में हम अपनी छुट्टी भी नहीं ले पा रहे हैं। क्रिसमस और नये साल की पार्टी भी निकल गयी। और जब आपके सारे नेता बोल ही रहे हैं कि ‘फ़ैसला हमारे पक्ष में ही आयेगा’ तो लगे हाथों ये भी बता ही दीजिए कि फ़ैसला क्या आयेगा!”

“और अब तो कल आपने भी कह ही दिया कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अथ्यादेश लाएँगे, यानि हमारा फ़ैसला तो बस एक फ़ॉरमैलिटी है! होना तो वही है, जो आप रचि राखा! तो प्लीज़ हमें बता दीजिए कि करना क्या है!” -जजसाब ने चिट्ठी के अंत में पूछा।

फिलहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने जजसाब की इस चिट्ठी का जवाब नहीं दिया है। वो अपनी कैबिनेट (शाहजी) और आरएसएस के नेताओं के साथ मीटिंग में विचार-विमर्श कर रहे हैं कि सोने की मुर्गी का पेट फाड़कर सारे अंडे एक बार में ही निकाल लिये जायें या उससे रोज़ एक-एक अंडा लिया जाये। अंतिम समाचार लिखे जाने तक मीटिंग चालू थी।



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