Thursday, 20th September, 2018

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'बैंक ऑफ़ चाइना' को भारत में खोलना मोदी जी का एक और मास्टर स्ट्रोकः पीयूष गोयल

06, Jul 2018 By Saquib Salim

नयी दिल्ली. देश के कामचलाऊ वित्तमंत्री पीयूष गोयल ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया द्वारा चीनी बैंक ‘बैंक ऑफ़ चाइना’ को लाइसेंस देने के फ़ैसले की सराहना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले महीने चीनी राष्ट्रपति से इसका वादा किया था, जिसके बाद रिज़र्व बैंक ने यह लाइसेंस दिया है।

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मोदी जी का एक और मास्टर स्ट्रोक

गोयल साब ने आज एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि “भारतीय जनता में चीन के प्रति भारी गुस्सा है। चीन ने डोकलाम में जिस तरह से घुसपैठ की और फिर सयुंक्त राष्ट्र में पाकिस्तान का समर्थन किया, उससे भारत का बच्चा-बच्चा चीन को सबक़ सिखाने के लिए आतुर है। पिछले चार सालों से इसी नफ़रत और गुस्से के चलते देश की जनता चीनी पटाखों, दीयों, और झालरों का बहिष्कार कर-कर के चीन को नाकों चने चबवा रही है और चीन थर-थर काँप रहा है।”

“मगर क्या करें! हम दुश्मन को भी रोता हुआ नहीं देख पाते और हमारा दिल पसीज जाता है और हम चीन में बने फ़ोन और अन्य महँगे सामान ख़रीद लेते हैं वरना तो वीर शिवाजी के वंशज जब पांच-दस रुपये की झालरों का बायकॉट कर सकते हैं, तो अस्सी हज़ार का एप्पल का आईफ़ोन भी चीन के मुँह पर मार सकते हैं। पर क्या करें हमारा दिल उदारता से भरा हुआ है।”

“असल में, चीन के बैंक को भारत में ब्रांच खोलने की अनुमति देना मोदी जी का एक और मास्टर-स्ट्रोक है। इसके बाद अब हमें हर साल दीवाली का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। अब हम किसी भी दिन ‘बैंक ऑफ़ चाइना’ का बायकॉट करके अपना गुस्सा ज़ाहिर कर सकेंगे और चीन की पतलून गीली कर सकेंगे। इस बायकॉट का एक फ़ायदा ये भी होगा कि नोटबंदी और GST के बाद जिन लोगों के पास झालर खरीदने के पैसे नहीं बचे हैं, अब वे भी सड़क पर नारे लगा सकेंगे कि हम चीनी बैंक का बहिष्कार करते हैं।”

“इससे ग़रीब भारतीयों को ‘फ़ील गुड फैक्टर’ का अहसास होगा और उन्हें लगेगा कि वे गरीब नहीं हैं और इसका कारण उनका बैंक बैलेंस नहीं, बल्कि उनको महसूस होगा कि वे देश सेवा के जज़्बे से ओत-प्रोत होकर ख़ुद ही बैंक का बायकॉट कर रहे हैं।”

गोयल साब ने ये भी बताया कि ऐसी ही योजना के तहत हमारी सरकार पहले पाकिस्तान से चीनी का आयात भी कर चुकी है और तब भी उसका बायकॉट करके लाखों भारतीयों में देशप्रेम का संचार हुआ था। “तो क्या अब आप पाकिस्तान का बैंक भी खुलवाएँगे?” -इसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं, अभी पाकिस्तान का बैंक खोलने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि उससे देशप्रेम ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ सकता है।”



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