Tuesday, 18th September, 2018

चलते चलते

ऑफिस के बाहर चाय की दुकान वाले ने किया कम्पनी का रेवेन्यू टार्गट पार

24, Mar 2018 By Guest Patrakar

बेंगलुरु. चायवालों ने धूम मचा रखी है। चाहे वो दिल्ली हो, गुजरात हो या भारत का कोई भी कोना हो। अभी हाल ही में बेंगलुरु में एक चाय वाले ने तब धूम मचा दी जब उसने उस कम्पनी के रेवेन्यू टार्गट पार कर दिया जिसके सामने वो अपनी चाय का खोखा लगाता है।

चाय बनाता सोनू
चाय बनाता सोनू

नेत्रा आइटी फ़र्म वालों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनके दफ़्तर के बाहर चाय की दुकान लगाने वाला मनोज रेवेन्यू के मामले उनकी कम्पनी को ही पछाड़ देगा। हमने मनोज से बात की और इस मामले की अधिक जानकारी ली। मनोज ने बताया “मैं पिछले पंद्रह साल से यह दफ़्तर के बाहर चाय की दुकान लगाता हूँ। मेरी एक गुमठी केम्पेगोवडा में भी है जिसे अभी तीन साल हुए है। मेरी चाय की क़ीमत दस रूपए, मसाला बन की क़ीमत बीस रुपए और फ़ेन, मट्ठी या किसी भी अन्य सामान की क़ीमत चालीस रुपए से ज़्यादा नहीं है। और लगभग हर ऑफ़िस में मेरी ही चाय बिकती है। मुझे आश्चर्य है कि इसके बावजूद मैंने दफ़्तर की आमदनी को पिछाड़ दिया। मुझे यह काम अच्छा लगता है। कम से कम किसी की सुननी नहीं पड़ती और मैंने ख़ुद दो और लोगों को इस दुकान में रोज़गार दिया हुआ है।”

हमने इस बारे में दफ़्तर के मालिक वेणुगोपाल से भी बात की और उनकी राय जानी। उन्होंने कहा “मुझे ग़ुस्सा भी है मगर गर्व भी है कि एक मामूली इंसान ने मेहनत करके मेरे ही ऑफ़िस के रेवेन्यू की रेड पीट दी। मनोज लाजवाब चाय बनाता है। हमारे ऑफ़िस-ऑफ़िस से ही उसे सालाना तीन लाख से ऊपर तक का बिज़्नेस मिलता है ज़ाहिर है कि उसका रेवेन्यू हमसे ज़्यादा होगा। मगर यह बात मेरे लिए चिंता का विषय बन गयी है क्यूँकि अब मेरे ऑफ़िस का लगभग हर बंदा नौकरी छोड़ ख़ुद की चाय की दुकान लगाने की सोच रहा है। अब उनका इंक्रिमेंट करके मुझे वापस उनके अंदर का बिज़नेसमैन मारना पड़ेगा”।

सूत्रों की माने तो मनोज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का और मन की बात के अगले एपिसोड में शामिल होने का मौक़ा मिल सकता है। जहाँ मनोज सेल्फ़ एम्प्लॉमेंट पर ज्ञान देते नज़र आ सकते है।

वैसे मनोज एक उदाहरण है उन नौ से छः ऑफ़िस में घुट-घुट कर जीने वाले युवकों के लिए। हालाँकि चाय बेचने में या पकोड़े बेचने में ग्लैमर तो नहीं है मगर ख़ुद को रोज़गार देना किसी भी अन्य रोज़गार से बेहतर होता है। अब देखना यह है कि कितने लोग ऐसे लेख पढ़ कर अपनी नौकरीयाँ छोड़ कर बिज़नेस के समंदर में कूदने का दम भर सकते है।



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