Tuesday, 25th September, 2018

चलते चलते

छोटे नोटों को विकास की मुख्य धारा में लाने के लिए की गई थी नोटबंदी, RTI में हुआ खुलासा

30, Aug 2018 By Fake Bank Officer

नयी दिल्ली. एक तरफ भारतीय रिज़र्व बैंक की वार्षिक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि नोटबन्दी के बाद 99.3% पुराने नोट बैंकों में वापस आ गए हैं और दूसरी तरफ एक RTI कार्यकर्ता ने पता लगा ही लिया है कि आखिर नोटबंदी क्यों की गई थी? जो रहस्य नासा के वैज्ञानिक भी नही पता लगा पाए, वह नत्थूलाल ढींगरा नाम के एक RTI कार्यकर्ता ने पता लगा लिया है।

NEW 100 RS NOTES
विकास की मुख्यधारा में पीछे छूट गए थे छोटे नोट

वित्त मंत्रालय से सूचना के अधिकार (RTI) के अंतर्गत मांगी गई जानकारी से यह खुलासा हुआ है कि सौ-पचास के नोट विकास की रेस में ज्यादा तेज़ नहीं भाग पा रहे थे, इसलिए उनकी ‘विकास’ की गाड़ी हर बार छूट जाती थी। छोटे नोटों को आर्थिक विकास की मुख्य धारा में लाना जरूरी हो गया था इसलिए देश में नोटबंदी ठेल दी गई!

इस खुलासे से देश की जनता और मीडिया आश्चर्यचकित हैं क्योंकि आखिरी बार सरकार ने यह सूचना दी थी कि ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए नोटबंदी की गई है। उससे पहले किसी नेता ने यह भी बताया था कि नोटबंदी का असली मकसद ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन सुधारना है।

अलग-अलग देशों की खुफिया एजेंसियों ने भी नोटबंदी के उद्देश्यों के पता लगाने के लिए काफी हाथ-पैर मारे पर उनके हाथ भी कुछ नहीं लगा। यहाँ तक कि मोसाद ने भी इस बार हाथ जोड़ दिए थे कि भैया हमसे ना हो पाएगा!

फ़ेकिंग न्यूज को RTI का जवाब पढ़कर सुनाते हुए नत्थूलाल ने कहा “इसमें लिखा है कि सौ, पचास और अन्य दबे-कुचले नोट जिनको भिखारी भी नही पूछते थे, नोटबंदी के कारण ही समाज में उनका वर्चस्व बढ़ा है और देश के विकास की मुख्य धारा में शामिल हुए हैं! इस तरह नोटबंदी दबे-कुचले नोटों के लिए वरदान बनकर आया था! सामाजिक न्याय इसे ही कहते हैं!”

इसी बीच प्रधानमंत्री कार्यालय से खबरें आ रही हैं कि नवंबर 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद बार-बार जनता के सामने रोने वाले मोदीजी आज RBI के आंकड़े जारी होने के बाद फूट-फूट कर रोते नज़र आये।



ऐसी अन्य ख़बरें