Monday, 17th December, 2018

चलते चलते

"छैनी-हथौड़ा नहीं मिल रहा था, इसलिए चुप्पी तोड़ने में हुई देरी" -नीतीश बाबू

07, Aug 2018 By बगुला भगत

पटना. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुज़फ़्फ़रपुर शेल्टर होम केस पर आख़िरकार अपनी चुप्पी तोड़ ही दी लेकिन उसे तोड़ने के चक्कर में उनकी उँगली में चोट लग गयी। जिसके बाद उन्हें हॉस्पिटल ले जाना पड़ा, जहाँ मलहम-पट्टी करके उन्हें छुट्टी दे दी गयी।

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चुप्पी तोड़ते समय चोटिल हुई उँगली दिखाते नीतीश बाबू

हॉस्पिटल से घर पहुँचते ही नीतीश बाबू ने सहानुभूति बटोरने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और सबको अपनी उँगली दिखाई। फिर मीडियाकर्मियों को संबोधित करते हुए बोले, “बिहार की जनता के लिए एक उँगली तो क्या, हम पूरा बॉडी न्यौछावर कर देंगे!”

“लेकिन चुप्पी तोड़ने में आपने इतना टाइम क्यूँ लिया?” इस पर वो देरी की वजह बताते हुए बोले, “आप लोग तो जानते ही हो कि चुप्पी कितना मजबूत चीज़ होता है! और नेताओं की चुप्पी तो सबसे ज़्यादा मजबूत होती है, वो किसी छोटी-मोटी चीज़ से नहीं टूटती।

“वैसे हम इसे तोड़ना तो बहुत दिन से चाहते थे लेकिन कोई ढंग का औज़ार नहीं मिल रहा था। जैसे ही हमें छैनी-हथौड़ा मिला, हमने इसे तोड़ दिया!” फिर साथी नेताओं को सलाह देते हुए बोले, “चुप्पी तोड़ने में हड़बड़ी बिल्कुल नहीं दिखाना चाहिए, नहीं तो कोई भी दुर्घटना हो सकती है।”

वो ये सब कह ही रहे थे कि तभी किसी ने आकर बताया कि विनेश ठाकुर नाम के पॉकेटमार ने उनके एक विधायक का पॉकेट मार लिया है। यह सुनते ही सुशासन बाबू ने विनेश ठाकुर के पूरे परिवार को फ़ौरन अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया और विधायक के परिवार को ढाँढस बँधाने हेलीकॉप्टर से दरभंगा रवाना हो गये।



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