Saturday, 20th October, 2018

चलते चलते

मंत्री जी बोले- "पेट्रोल के बढ़ते दामों का विरोध करना देशद्रोह!"

13, Sep 2018 By Saquib Salim

नयी दिल्ली. मंत्री जी ने आज देश की राजधानी में एक सभा को संबोधित किया। उनके उस भाषण के कुछ अंश यहाँ प्रस्तुत किये जा रहे हैं, ताकि आप भी देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत हो सकें-

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विरोध करने वालों को डाँटते मंत्री जी

“अभी-अभी जब मैं अपनी सरकारी गाड़ी (जिसमें तेल सरकारी भत्ते से गिरता है) से बड़े वाले गोल चक्कर के पास से गुज़र रहा था, तो देखा कि कुछ अधर्मी, देशद्रोही, संस्कृति-विरोधी और नक्सल भोले-भाले देशवासियों को बहला-फुसलाकर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना था कि पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ गए हैं और सरकार को चाहिए कि इन दामों को क़ाबू करे।

भला ये भोली-भाली जनता इतना नहीं जानती कि पेट्रोल की बढ़ती क़ीमतें ही असल में वो रास्ता है, जिस पर चल कर देश उन्नति कर सकता है। आप को क्या लगता है कि सस्ता पेट्रोल या सस्ता डीज़ल देश को विश्व विजेता बना सकता है? कदापि  नहीं!

भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए आवश्यकता है कि हम अपनी संस्कृति एवं धर्म को पुनर्जीवित करें। आज आवश्यकता है कि देशवासी अपने उन प्राचीन मूल्यों को पहचाने, जिनका पालन कर हमारे पूर्वजों ने इस देश की प्राचीन सभ्यता का डंका पूरे जगत में बजवाया था।

आपने आपने कभी सोचा कि आख़िर वे क्या गुण थे, जिनके कारण हमारे पूर्वज इस देश को सोने की चिड़िया बनाने में सफल हुए थे?

उनमें प्रमुख गुण था- अध्यात्म को सर्वोपरि मानना! हमारे पूर्वज सभी भौतिक सुखों से दूर थे। वे भली-भांति जानते थे कि ये संसार नश्वर है और सारे भौतिक सुख क्षणभंगुर हैं, जो मनुष्य का साथ केवल इस लोक में ही देंगे। होने को तो वे भी स्वयं को इस लोक के लोभ विलास में लिप्त कर सकते थे परंतु उन्होंने कभी ऐसा नहीं किया। इसलिये आपने कभी ये नहीं पढ़ा या सुना होगा कि पाण्डव इस कारण कौरवों से ख़फ़ा थे कि पेट्रोल महँगा क्यों है और ये सस्ता क्यों नहीं होता। ना कभी ये सुना होगा कि सम्राट अशोक इस कारण बौद्ध बन गये कि डीज़ल की क़ीमतें नियंत्रण के बाहर जा रही थीं। महाराणा प्रताप और बादशाह अकबर का युद्ध भी कभी डॉलर की क़ीमतों पर नहीं हुआ।

आशय स्पष्ट है कि ये सभी महापुरुष जानते थे कि पेट्रोल, डीज़ल या डॉलर की क़ीमतें असल मुद्दा हैं ही नहीं! ये तो सांसारिक विलास की वस्तुएँ हैं और इनसे हम भारतीयों का क्या लेना देना! एक आदर्श भारतीय को चाहिए कि वो अपने स्वर्णिम इतिहास को न भूले और याद रखे कि ये भौतिकतावाद, ये लोभ, ये विलास हमारी संस्कृति का हिस्सा कदापि नहीं है। ये भौतिकतावाद तो पश्चिमी सभ्यता के फलस्वरूप हमारे जीवन में आ घुसा है। विदेशी आक्रमणकारियों से पहले तो सांसारिक लोभ हमारे देश में था ही नहीं। आवश्यकता है कि हम अपने मूल्यों को पहचानें।

अब दूसरा कर्म जो हमें देश को सर्व-शक्तिशाली बनाने के लिए करना होगा वो ये है कि हम अपने महान पूर्वजों के पदचिन्हों पर चलें। अब आप सोच रहें होंगे कि ये कैसे संभव है?

अच्छा ये बताइये, क्या वीर शिवाजी कभी पेट्रोल से चलने वाली गाड़ी में चले थे? क्या झाँसी की रानी पेट्रोल से चलने वाली बाइक पर चलती थीं? ये सब छोड़िये, आपने भगवान श्री राम को पेट्रोल-डीज़ल के वाहन से चलते सुना? नहीं ना?

असल में ये पेट्रोल से चलने वाले वाहन विदेशियों की वो साज़िश है, जिसके चलते वो हमें अपना ग़ुलाम बनाये रखना चाहते हैं। ये उनके एजेंट हैं जो चाहते हैं कि सरकार तेल सस्ता कर दे ताकि देश की जनता भौतिक लोभ में फँसकर देशहित की तिलांजलि दे दे। किंतु हम ऐसा नहीं होने देंगे।

देश का बच्चा-बच्चा इन नक्सलियों और देशद्रोहियों को मुंहतोड़ जवाब देगा। इतिहास साक्षी है कि कोई सुदामा श्री कृष्ण से मिलने बस या ट्रेन से नहीं गया, बल्कि पदयात्रा कर के पहुँचा। आज का भारतीय भी अपने उन सिद्धांतों को नहीं भूला और वो अब भी देशहित में पैदल चलना जानता है।

ये देशद्रोही, अधर्मी, नक्सली ताक़तें कितना ही ज़ोर क्यों ना लगा लें परंतु हम ये तेल के दाम कम नहीं होने देंगे। आख़िर देशहित ही सर्वोपरि है और उसके लिए छोटे-मोटे बलिदान देने से हम पीछे नहीं हटेंगे!

वन्दे-मातरम्!”

(भाषण के बाद मंत्री जी अपने एसी गाड़ियों वाले काफ़िले में बैठकर हवाईअड्डे के लिए रवाना हो गए और जनता ‘भारत माता की जय’ का उद्घोष करने लगी)



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