Saturday, 18th August, 2018

चलते चलते

कर्नाटक नतीजों से पहले ही अमित शाह ने किया सरकार बनाने का दावा, चुनाव आयोग ने जोड़े हाथ

14, May 2018 By Guest Patrakar

बैंगलोर/नयी दिल्ली. अगर राहुल गाँधी चुनावों के स्टूअर्ट बिन्नी हैं तो अमित शाह VVS लक्ष्मण हैं। जो कैसे भी करके अपनी टीम यानी अपनी पार्टी को जीत दिला ही देते हैं। कर्नाटक में चुनाव प्रचार और मतदान संपन्न हो गए हैं और अब वोटों की गिनती की बारी है। लेकिन अमित शाह ने नतीजों की घोषणा से पहले ही सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया है। जिसके चलते विपक्ष के साथ-साथ चुनाव आयोग भी हैरानी में पड़ गया है।

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कर्नाटक जीत का दावा करके मुस्कुराते अमित शाह

अमित शाह ने सरकार बनाने के लिए कल वजूभाई वाला को चिट्ठी लिखी और कहा कि अगर किसी को दिक़्क़त ना हो तो वो नतीजों से पहले ही सरकार बनाने का दावा पेश करना चाहते हैं। हमारे संवाददाता ने अमित शाह से बात की और उनके दावे के पीछे छुपे आँकड़ो को जानने की कोशिश की।

शाह ने कहा कि “मुझे पक्का यक़ीन है कि भाजपा को कर्नाटक में कम से कम 90 सीट हाथ लगेगी! और हमने बुरे वक़्त के लिए JDS से भी दोस्ती कर ली है! ऐसे में अगर उन्हें 30 सीटे भी मिलती हैं तो हम बड़ी आसानी से सरकार बना सकते हैं! ज़रूरत पड़ी तो दो-चार MLA काँग्रेस के ही ले आऊँगा लेकिन कर्नाटक को काँग्रेस मुक्त बनाके ही दम लूँगा! मेरी असली नज़र 2019 चुनाव पर है, ऐसे में किसी भी राज्य में हार मिली तो पार्टी में एक नकारात्मक असर पड़ेगा! इसलिए कर्नाटक किसी भी हालत में मैं जाने नहीं दे सकता!”

वैसे ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब अमित शाह ने अपनी कला से सबको चौका दिया हो। इस से पहले उन्होंने उत्तराखंड में चुनाव की घोषणा से पहले ही सरकार बनाने का दावा कर दिया था। इतना ही नहीं उन्होंने तो अमेरिका के चुनावों तक में भाजपा को जीताने की बात कर दी थी। डोनाल्ड ट्रम्प ने रोना-धोना शुरू कर दिया तब जाकर वो पीछे हटे थे।

हालाँकि, चुनाव आयोग अमित शाह के इन बयानो से ख़ुश नहीं है। उनका कहना है कि “ऐसे बयान सुनने में लुभावने लगते है मगर यह लोकतंत्र के लिए हानिकारक है! इस तरह के सुझावों से इलेक्शन का पैसा बच सकता है, लेकिन यह है तो ग़लत ही ना! UP चुनावों में कम सीट आने पर राहुल गाँधी अपने घर से ‘सीट’ ले आए थे और हमसे पूछा था कि ‘क्या मैं सरकार बना सकता हूँ?’ तब हमने उन्हें समझाया था कि ‘सीट’ का मतलब चुनाव की सीट से होता है, कार की सीट नहीं! तो वो नाराज हो गए और अपनी पंजाब की सीटें यूपी में एडजस्ट करने की बातें करने लगे! बड़ी मुश्किल से समझाया था हमने उन्हें!”

वहीँ, कर्नाटक चुनाव का असली फ़ैसला तो 15 मई को हो ही जाएगा, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कर्नाटक में मोदी का जादू चलेगा या एक बार फिर भाजपा अमित शाह के बलबूते पर अपनी सरकार बनाएगी।



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