Tuesday, 19th June, 2018

चलते चलते

घोड़ा संघ का बयान: "'हॉर्स ट्रेडिंग' शब्द का उपयोग अपमानजनक"

17, May 2018 By Saquib Salim

रामगढ़. कर्नाटक चुनाव का रिजल्ट आने के बाद से ही सभी अख़बार और न्यूज़ चैनल्स ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ की ख़बरें चलाने में लगे हुए हैं, जिस पर ‘अखिल भारतीय घोड़ा संघ’ (अभाघोस) के अध्यक्ष श्री अश्व श्याम ने घोर आपत्ति जताई है। अश्व जी ने एक प्रेस कांफ्रेंस में आज अपनी बात रखी।

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शाह जी की ओर लाचारी से देखते घोड़े

बसंती की धन्नो के पति श्री अश्व जी का कहना था कि “‘हॉर्स ट्रेडिंग’ शब्द का उपयोग समस्त घोड़ा जाति के लिए अपमानजनक है। घोड़ा जाति ने कभी भी बेईमानी नहीं की, घोड़े हमेशा से मेहनत कर के अपना पेट पालते आये हैं। पूरा-पूरा दिन घोड़ा-गाड़ी में जुतकर दो जून की रोटी घोड़े को नसीब होती है और वो उसमें ही खुश रहता है। इतिहास साक्षी है कि कभी किसी घोड़े ने ख़ुद अपनी बोली नहीं लगायी, हमेशा मनुष्य ने उसके नाक में नकेल डाल कर अपने स्वार्थ के लिए ही घोड़े को बेचा है।”

ऐसे में घोड़ों की तुलना नेताओं से करना और वो भी भारतीय नेताओं से, समस्त घोड़ा जाति का अपमान है। श्री श्याम ने कहा कि “हम घोड़े अपनी मेहनत बेचते हैं और हमारा तन भी बेचा जाता है, परन्तु आज तक किसी घोड़े ने अपना ज़मीर नहीं बेचा। ये नेता लोग तो पेट भर जाने के बाद भी घर में पैसा भरने कि फ़िराक में लगे रहते हैं, और जब कुछ और नहीं बचता तो ईमान का सौदा कर लेते हैं।”

घोड़ा समाज का मानना है कि किसी भी प्रकार से नेताओं से उनकी तुलना किये जाने से वे जानवरों के बीच बदनाम हो जायेंगे। उनका कहना था कि “ना तो घोड़े नेताओं की तरह झूठ बोलते हैं और ना ही दंगे कराते हैं। यहाँ तक कि आज तक किसी घोड़े ने अपना काम करने के लिए रिश्वत नहीं मांगी।”

इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से सवाल किया कि “क्या आज तक आपने सुना है कि फलाँ घोड़े ने अपने दामाद को ठेका दिला दिया या फलाँ घोड़े ने अपने बेटे की कंपनी को कई हज़ार गुना का मुनाफ़ा करा दिया? नेता तो ऐसा आये दिन करते रहते हैं, बल्कि जो ये नहीं करता वो नेता बन ही नहीं सकता!”

“इसलिए हमारी मांंग है कि ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ शब्द के प्रयोग पर तुरंत रोक लगाई जाए वरना हम अदालत का सहारा लेंगे!” फिर उन्होंने ज़मीन पर खुर रगड़ते हुए कहा कि “हम तो नेताओं के साये से भी दूर रहना चाहते हैं। अभी हमारा घोड़ा समाज बड़ा खुश है। ना हम में हिन्दू-मुसलमान का कोई झगड़ा है, ना अमीर ग़रीब का फ़र्क है और ना ही कोई लेफ़्ट-राइट!”

अंत में श्री अश्व श्याम जी ने यह कहते हुए बात ख़त्म की- “लाठी गोली खायेंगे पर नेता ना कहलायेंगे!”



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