Tuesday, 19th February, 2019

चलते चलते

पटाखे फोड़कर जेल पहुँचा इंजीनियरिंग छात्र, जज से कहा- "जेल का खाना अच्छा है, छः महीने की सजा दो!"

11, Nov 2018 By Ritesh Sinha

नयी दिल्ली. मेस का खाना खा-खाकर परेशान इंजीनियरिंग छात्र अब अच्छा भोजन पाने के लिए कुछ भी करने को आमादा हैं। ओखला के रहने वाले संदीप कुमार को ही ले लीजिए, जिसने सिर्फ इसलिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन कर दिया ताकि पुलिस उठाकर ले जाए और कुछ दिन उसे जेल में अच्छे खाने का लुत्फ़ उठाने का मौका मिल जाए।

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संदीप को जेल ले जाती पुलिस

दरअसल, संदीप ने पटाखों पर बैन लगने के बावजूद तीन सुतली बम, बीच सड़क पर रखकर फोड़ दिए। पटाखे की आवाज सुनकर पुलिसवाले दौड़कर आए और संदीप को जीप में डालकर जेल ले गए।

पहले दिन ही संदीप को जेल की फीकी दाल से प्यार हो गया। अधजली चपातियों ने उसका मन मोह लिया। उसने मन ही मन कहा, “मेस के खाने के सामने ये जेल का खाना तो मुझे छप्पन भोग की तरह लग रहा है!”  इस तरह बहुत दिन बाद उसने दबाकर खाना खाया।

दूसरे दिन जब उसे जज के सामने पेश किया गया तो जज साब ने उसे तीन महीने की सजा सुना दी। इतनी काम सजा पाकर संदीप को रोना आ गया। उसने जज मुरलीधर पांडे का पैर पकड़ लिया। “कम से कम छः महीने की सजा तो दीजिए जज साब! यहाँ का खाना, हॉस्टल के खाने से सौ गुना अच्छा है, मुझे वहाँ नहीं जाना! अभी कुछ दिन यहीं रहकर मैं बदन बनाऊंगा! प्लीज जज साब, मेरी सजा बढ़ा दीजिए!”

संदीप को गिड़गिड़ाता हुआ देखकर जज साब का दिल पसीज गया और उन्होंने संदीप की सजा बढ़ाकर छः महीने कर दी। जज साब ने कहा “मैंने भी ‘लॉ’ पढ़ने से पहले इंजीनियरिंग की थी, इस बंदे का दर्द मैं अच्छे से समझ सकता हूँ, जा बेटा, जी ले अपनी जिंदगी!” संदीप ख़ुशी से झूम उठा। विशेषज्ञों का भी मानना है कि मेस के खाने से जेल का खाना लाख गुना अच्छा होता है।

इस साल जब दीपावाली के पटाखों पर बैन लगाया गया था तो बहुत से लोग इसका विरोध कर रहे थे, लेकिन संदीप जैसे भावी इंजीनियरों का दिमाग सबसे अलग चलता है, वो ऐसे माहौल में भी अपने फायदे की चीज़ ढूंढ निकालते हैं। जेल के अंदर से सूचना मिली है कि संदीप अब बहुत खुश है और जेल का खाना उसे सूट भी कर रहा है।



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