Wednesday, 19th December, 2018

चलते चलते

हवा में सौ सिगरेट का धुआँ वाली बात से दिल्ली में इंजीनियरो की उमड़ी भीड़

19, Nov 2018 By Guest Patrakar

ब्यूरो. दिल्ली में प्रदूषण दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, आलम यह है कि दिल्ली की हवा में साँस लेना वैसा ही है जैसे सौ सिगरेट एक साथ पीना। और यही कारण है कि देशभर के इंजीनियर दिल्ली में अपना डेरा डाल रहे हैं ताकि सुट्टे पर खर्च होने वाला पैसा बचा सकें! हालाँकि देश के कुछ हिस्सों में इसे ‘चिंदीगिरी’ भी कहा जाता है, लेकिन इंजीनियरों का कहना है कि ‘सह लेंगे थोड़ा!’

इंजीनियरो rngineer
दिल्ली चलो!

एक ख़ास सर्वे की मानें तो इस ख़बर के ब्रेक होने के बाद दिल्ली के इंजीनियरो में चालीस प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ है। बागपत,  मेरठ, नोएडा, गाजियाबाद वाले सब इधर ही आ गए हैं और एक छोटी सी खोली किराए पर लेकर पैसे बचा रहे हैं!

अधिक जानकारी के लिए हमने सर्वे कराने वाली संस्था के डायरेक्टर रमेश चोटरानी से बात की, उन्होंने बताया कि  “दिवाली के बाद कई इंजिनयरिंग स्टूडेंट्स दिल्ली आ रहे हैं, पहले हमें लगा यहाँ कोई बड़ा भंडारा होने वाला है लेकिन बाद में पता चला कि इसका कारण तो दिल्ली की हवा में मौजूद सौ सिगरेटों की शक्ति है!

“कई इंजीनियर तो सड़कों पर शराब लिए घूम रहे हैं,, वो एक पेग मारते हैं, और ज़ोर से साँस खींचकर सिगरेट की कसर पूरी कर लेते हैं! अब बताइए है कहीं पर ऐसी सुविधा? यह ख़तरनाक तो है, लेकिन जिसने इंजीनियरिंग करने को चुना हो उसे ख़तरों की कहाँ परवाह रहती है!” -चोटरानी ने आगे बताया।

ऐसे ही एक इंजीनियर मनोज टापरीवाला से हमने बात की, उसने बताया “देखिए हमारा सबसे ज़्यादा ख़र्च चाय और सिगरेट में ही होता है, उधारी इतनी बढ़ जाती है कि एक छोटी-मोटी ‘मदर इंडिया’ की स्टोरी बन जाए! ऐसे में कहीं मुफ़्त में सिगरेट के मज़े मिल जाए तो कोई उसे कैसे छोड़ सकता है भला? मैं तो कोशिश कर रहा हूँ कि इस हवा को टिफिन में डालकर रख लूँ ताकि गर्मियों में भी में भी काम आए!”

इस घटना से हमें पता चलता है कि हालात चाहे कितनी भी बुरे हों लेकिन एक क़ौम है जो जो कि हर हाल में एडजस्ट करके ख़ुशी ढूँढ लेती है, वो है – इंजीनियर।



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