Tuesday, 17th September, 2019

चलते चलते

खाली हो रही शैम्पू की बोतल में युवक ने नहीं डाला पानी, माँ ने काटी पॉकेट मनी

16, Feb 2018 By banneditqueen

सतना. पुराने कपड़े का पोछा, पुरानी प्लास्टिक की खाली बोतलों में गमले इत्यादि इत्यादि जुगाड़ के लिए भारतीय माध्यम वर्ग कुख्यात है। इन जुगाड़ों का असर ये है कि बेकार हो रही कोई चीज़ इस अवस्था में आ जाए जब उसका कोई इस्तेमाल संभव न हो तब माध्यम वर्ग लोगों के दिल को काफी ठेस पहुँचती है। कल के बचे हुए चावल की बिरयानी और बची हुई दाल का पराठा बनाने वाला ये वर्ग बचे हुए सामान को बेकार फेंकने वालों को भी नहीं बख्शता।

कम से कम साल भर चलेंगी ये खाली बोतलें
कम से कम साल भर चलेंगी ये खाली बोतलें

ऐसा ही कुछ हुआ रोमन मूलचंदानी के साथ। दरअसल रोमन कल जब नहाकर निकला तो उसकी माँ ने देखा की रोमन ने शैम्पू की बोतल कचरे के डब्बे में फेंक दी। इस पर रोमन की माँ उससे सवाल जवाब करने लगी, रोमन की माँ ने उससे पूछा ”ये शैम्पू की बोतल कचरे में क्यों फेंकी ?” इस पर रोमन ने जवाब दिया ”क्यों फेंकी का क्या मतलब है? ख़तम हो गया था शैम्पू इसलिए फेंक दी।” यह सुनते ही रोमन की माँ का पारा चढ़ गया, चिल्लाते हुए बोली ”पैसे तो पेड़ पर उग रहे हैं ना? उस शैम्पू की बोतल में पानी डालकर सर धोता तो काम से 2 हफ्ता और चलती वो बोतल।”

इस पर रोमन ने कहा ”बोतल भी क्यों फेंक रही हो उसको भी रख लो सजा कर।” या सुनते ही रोमन की माँ ने जवाब दिया ”बस अब बहुत हुआ, तुम्हारी इस महीने की पॉकेटमनी से शैम्पू की बोतलें आएंगी और इस महीने एक रुपया भी नहीं मिलेगा। इस घटना के बाद से रोमन कोई भी सामान अपनी माँ से पूछे बगैर नहीं फेंकता।



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