Friday, 22nd November, 2019

चलते चलते

'एक बिहारी सौ पे भारी' की जगह अब 'एक गुजराती सौ पे भारी' बोलेंगे सब! - केंद्र सरकार

03, Oct 2019 By बगुला भगत

पटना/अहमदाबाद/नयी दिल्ली/मुंबई.  जानी-मानी कहावत ‘एक बिहारी सौ पे भारी’ के दिन अब लद गये हैं। इसकी जगह देश में अब नयी कहावत शुरु होगी- ‘एक गुजराती सौ पे भारी!’ इसके लिए सरकार जल्दी ही संसद का विशेष सत्र बुलाकर संविधान में संशोधन करने वाली है।

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एक बिहारी सौ पे भारी

इस फ़ैसले की जानकारी देते हुए संसदीय कार्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया, “आज एक गुजराती पूरे देश को चला रहा है, एक गुजराती पूरे देश को डाटा दे रहा है, एक गुजराती का फ़ोटो सारे नोटों पे छपा है, एक गुजराती का स्टेच्यू सारे स्टेच्यूओं से ऊँचा है, एक गुजराती (भुवन बाम) सबसे बड़ा यू-ट्यूबर है…मतलब एक अकेला गुजराती ऐसा काम कर देता है, जिसे सौ लोग मिलकर भी नहीं कर सकते। तो सौ पे भारी कौन हुआ, बोलो!”

उधर, मुंबई में रिक्शा चलाकर रोज़ी-रोटी कमा रहे एक बिहारी रामभरोसे तो इस बात को सुनते ही भड़क गये और बोले, “हमने इससे फालतू बकवास (एक बिहारी सौ पे भारी) आज तक नहीं सुना। जिसका जब मर्जी होता है, हमें पीट देता है- चाहे मुंबई हो, गुजरात हो, दिल्ली हो, पंजाब हो, असम हो। बस बिहार में आपस में बोल-बोल के ही खुस होते रहते हैं…ससुर के नाती!”

इस पूरे मुद्दे पर जाने-माने समाजशात्री जोजा (जोगेन्द्र जाधव) का कहना है कि “जैसे अपने घर में सारे माँ-बाप यही सोचते हैं कि उनका लाड़ला सबसे होनहार है। वैसे ही हमारे हर राज्य के लोगों ने अपने लिये कोई ना कोई ‘बड़ी बात’ बना रखी है। ऐसे ही बिहारी लोग आपस में बोल-बोल के ख़ुश हो लेते हैं कि वे सौ पे भारी हैं। यह एक साइकोलॉजिकल बीमारी है।”



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