Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

कपड़ों से हमलावरों को पहचानने में नाकाम रही दिल्ली पुलिस, दूसरी तरकीब सुझाने के लिए माँगी PMO की सलाह

06, Jan 2020 By किल बिल पांडे

नयी दिल्ली. पाकिस्तान के बाद न्यूज़ चैनलों को डिबेट के सबसे ज़्यादा मुद्दे प्रदान करने वाली बहुप्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) एक बार फिर सुर्ख़ियों में है। लगभग 50 नक़ाबपोश हमलावरों ने जेएनयू के हॉस्टलों में जाकर तोड़फोड़ करते हुए हमला किया।      

JNU-Attack
कपड़ों से पचानना है मुश्किल

इस हमले के बाद हर कोई यही सवाल करने लगा कि आम तौर पर लाइब्रेरी तक में बेफ़िक्री से घुस जाने वाली पुलिस की धार को अब कौन सा ज़ंग लग गया? लेकिन चौतरफा आलोचना झेल रही दिल्ली पुलिस ने ख़ुद पर लगे इल्ज़ामों का जवाब देना शुरू कर दिया है।

जेएनयू के गेट के पास उबासी लेते हुए कांस्टेबल जोगिन्दर ने चाय पिलाने की शर्त पर फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया कि “हर कोई यही पूछ रहा है कि हमारे रहते सारे हमलावर हमारे सामने से कैसे निकल लिए? तो भाई बात ये है कि हमें लगा कि ये सारे दिल्ली के वकील है, इसलिए हमने उन्हें पकड़ने का रिस्क नहीं लिया। पता नहीं कौन कमबख़्त ये अफ़वाह फैला गया!”

यह पूछे जाने पर कि हमलावरों को पकड़ने के लिए कौन से कदम उठाये गए तो जोगिन्दर ने कहा, “देखो जी! इस बार तो हम उनको पकड़ने के पूरे मास्टर प्लान के साथ आये थे। वही, जो मोदी जी ने ख़ुद बताया था। सबके फ़ोटो कैमरे में तो कैद थे ही। बस! सबको कपड़ों से पहचानना था पर हमारा प्लान फेल हो गया!” – जोगिन्दर ने रूआँसा होते हुए कहा।

“दरअसल जब हमने CCTV फुटेज खँगाली तो देखा कि जिन गुंडों को हमें पहचानना था, उनकी फोटो कम रोशनी के कारण अच्छी नहीं आई थी, इसलिए कपड़ों का कलर अच्छे से पता नहीं लग पाया। ऊपर से फ्लैगमार्च के वक़्त हमने पाया कि सारे छात्र एक से ही कपड़े पहनते हैं। कोई भला पहचाने भी तो कैसे!” जोगिन्दर ने चाय का बिल हमारे रिपोर्टर के हाथ में थमाते हुए कहा।

सूत्रों की मानें तो इस मास्टरप्लान के फेल हो जाने के बाद दिल्ली पुलिस ने पीएमओ को चिट्ठी लिखकर पहचान करने की कोई दूसरी तरकीब बताने का आग्रह किया है।



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