Tuesday, 31st March, 2020

चलते चलते

पुलिस झड़प में पिटे छात्र 'जश्न-ए-रेख़्ता' में दर्द भरी शायरियाँ सुनाकर निकाल रहे हैं भड़ास

16, Dec 2019 By किल बिल पांडे

नयी दिल्ली. उर्दू अदब और साहित्य का सालाना महोत्सव जश्न-ए-रेख़्ता शुक्रवार को शुरू हो गया। लेकिन शायरों, लेखकों, कलाकारों और गायकों के भाग लेने के साथ-साथ, यह महोत्सव अब लुटे-पिटे शायरों की दर्द भरी शायरियों के कारण ज़्यादा सुर्खियाँ बटोर रहा है।

Jashn-e-Rekhta
जश्न-ए-रेख़्ता में शायरी करते कुछ प्रदर्शनकारी

ख़बर है कि दिल्ली के अलग-अलग प्रदर्शनों में पिटे छात्र एकजुट होकर मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में आयोजित इस महोत्सव में अपनी दर्द भरी शायरियाँ सुनाकर सिस्टम के ख़िलाफ़ जमकर अपनी भड़ास निकाल रहे हैं।

जब मीडिया और सरकार ने इनकी बात नहीं सुनी, तो खुद पर हुए ज़़ुल्म-ओ-सितम को बयान करने के लिए ये छात्र बड़ी तादाद में इस साहित्यिक महोत्सव का रुख़ कर रहे हैं। आलम यह है कि ऐसे दर्द भरे दिलजले शायरों की संख्या और आक्रोश को देखते हुए आयोजकों ने पहले से प्रस्तावित कार्यक्रमों को रद्द करते हुए इन्हें मंच प्रदान करना शुरू कर दिया है। जो लोग किसी कारणवश मंच पर शायरियाँ नहीं सुना पा रहे हैं, वे एक-दूसरे को पकड़कर ही अपनी आप बीती सुना कर सुकून पा रहे हैं।

ऐसे ही एक आयोजक फेफड़ा मुरादाबादी ने फ़ेकिंग न्यूज़ को बताया कि “अमा मियाँ, क्या बताएँ! ओपन माइक में ज़्यादातर सिंगल लौंडे ही अपना दुखड़ा सुनाते हैं। ऊपर से जब सिंगल लौंडा पिट जाये तो वो जिस दर्द से गुज़र रहा होगा, उसका लेवल ही अलग होगा। ऐसे टूटे-फूटे दिल से ही तो आँखें भिगो देने वाले शेर निकलते हैं।” – मुरादाबादी ने चार ग़ज़लें रिपोर्टर में मुँह पर चिपकाते हुए कहा।

चार घंटे बाद होश में आये रिपोर्टर ने बताया कि इन शायरियों को जनता का भी अच्छा रेसपोंस मिल रहा है। भड़ास की खबर मिलते ही गृह मंत्रालय ने पूरे इलाके का इन्टरनेट बंद करते हुए ‘सब कुछ ठीक-ठाक है’ वाला बयान जारी कर दिया है।



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